राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर सख्त संदेश दिया, कहा- ‘हम गिरिराज जी के भक्त हैं, अरावली को कोई नुकसान नहीं होने देंगे।’ अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई और पर्यावरण सुरक्षा की नीति।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। सीएम भजनलाल ने कहा कि उनकी सरकार अरावली के हर पत्थर की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस मामले में कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने अरावली को केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं बल्कि आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय बताया।
‘हम गिरिराज जी के भक्त हैं, अरावली को कोई नुकसान नहीं होने देंगे’
जयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम भजनलाल ने कहा, “हम गिरिराज जी के भक्त हैं और उनकी पूजा करते हैं। हमारी सरकार संरक्षण में विश्वास रखती है, लूट में नहीं। अरावली की अस्मिता के साथ कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता।” उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे आरोप लगाने से पहले अपने कार्यकाल के फैसलों का पुनर्मूल्यांकन करें।
अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं, हमारी पहचान है।
मैं सभी को विश्वास दिलाता हूँ कि अरावली पूरी तरह सुरक्षित है। इससे कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। pic.twitter.com/CpMsL5jlmZ
— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) December 22, 2025
कांग्रेस शासनकाल पर उठाए गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासनकाल में अरावली क्षेत्र में अवैध खनन को बढ़ावा मिला। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय साधु-संतों को खनन माफिया के खिलाफ 551 दिनों तक आंदोलन करना पड़ा। वर्तमान भाजपा सरकार अरावली के संरक्षण में पूरी तरह सक्रिय है।
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अरावली: पर्यावरण और आस्था का प्रतीक
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बताया कि अरावली केवल कानून या राजनीति का विषय नहीं, बल्कि यह राजस्थान की पहचान और जनआस्था से जुड़ा हुआ मुद्दा है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने भी कहा कि कांग्रेस भ्रम फैला रही है और भाजपा का रुख स्पष्ट है कि अरावली पूरी तरह संरक्षित रहेगी।
अवैध खनन पर सख्ती और नए पट्टों पर रोक
प्रदेश और केंद्र सरकार मिलकर अरावली की सटीक परिभाषा तय कर अवैध खनन पर स्थायी रोक लगाने की दिशा में काम कर रही हैं। नए खनन पट्टे तब तक जारी नहीं होंगे जब तक नई व्यवस्था लागू नहीं हो जाती। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार जीरो टॉलरेंस नीति के साथ अरावली के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।