Saturday, April 18, 2026

गणतंत्र दिवस 2026: पंजाब सरकार की झांकी में मानवता, आध्यात्मिकता और बलिदान की अनोखी छवि

by Neha
गणतंत्र दिवस 2026: पंजाब सरकार की झांकी में मानवता, आध्यात्मिकता और बलिदान की अनोखी छवि

गणतंत्र दिवस 2026 पर पंजाब सरकार की झांकी ने मानवता, आध्यात्मिकता और बलिदान की भावना को जीवंत किया, दर्शाते हुए गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत।

गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर पंजाब सरकार की झांकी ने मानवता की एकता, करुणा और निस्वार्थ बलिदान की भावना को जीवंत कर दिया। इस झांकी का उद्देश्य आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द के आदर्शों को प्रदर्शित करना है। एक आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, झांकी को दो हिस्सों में प्रस्तुत किया गया है – ट्रैक्टर और ट्रेलर।

ट्रैक्टर हिस्सा

ट्रैक्टर भाग में हाथ का प्रतीक दर्शाया गया है, जो मानवता और करुणा की आध्यात्मिक आभा को उजागर करता है। इसके आगे दिव्य “एक ओंकार” प्रतीक घूमता हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि ‘हिंद दी चादर’ को दर्शाने वाला कपड़े का टुकड़ा उत्पीड़ितों और शरणार्थियों के लिए सुरक्षा का संदेश देता है।

ट्रेलर हिस्सा

ट्रेलर भाग में रागी सिंहों द्वारा शबद कीर्तन आयोजित किया गया है, जिसके पृष्ठभूमि में खंडा साहिब का स्मारक स्थित है। यह स्थल दिल्ली में गुरुद्वारा श्री सिस गंज साहिब के सामने है, जहाँ दैनिक रूप से शबद कीर्तन का आयोजन होता है। ट्रेलर के किनारे गुरु साहिब के समर्पित अनुयायियों – भाई मति दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी – की शहादत को दर्शाया गया है। ये सभी गुरु तेग बहादुर साहिब जी के उच्च आदर्शों और मानवता के सर्वोच्च मूल्यों के प्रति समर्पित थे।

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धार्मिक और ऐतिहासिक कार्यक्रम

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के मार्गदर्शन में 23 से 29 नवंबर 2025 तक श्री आनंदपुर साहिब में नौवें सिख गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम बड़े श्रद्धा भाव से आयोजित किए गए।

इतिहास में पहली बार पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र भाई जैता जी स्मारक पर आयोजित किया गया, जो इस वर्ष के कार्यक्रमों की अनोखी विशेषता रही। धार्मिक समारोहों का शुभारंभ 25 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली के गुरुद्वारा श्री सिस गंज साहिब में अरदास के साथ हुआ। श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर), तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो, फरीदकोट और गुरदासपुर से नगर कीर्तन श्री आनंदपुर साहिब में एकत्रित हुए। इसके साथ ही पंजाब के अन्य हिस्सों में भी नगर कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

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