Saturday, April 18, 2026

Punjab News: श्री अकाल तख्त पर शिरोमणि अकाली दल के बागी नेताओं ने माफी मांगी, कहा कि सुखबीर बादल ने नहीं मानी बात

by editor
Punjab News: श्री अकाल तख्त पर शिरोमणि अकाली दल के बागी नेताओं ने माफी मांगी, कहा कि सुखबीर बादल ने नहीं मानी बात

Punjab News: शिरोमणि अकाली दल के बागी नेताओं ने श्री अकाल तख्त पर लिखित माफी मांगी, जो अकाली सरकार के दौरान हुई चार बड़ी गलतियों के कारण हुई थीं। बागी नेताओं ने कहा कि वे सभी परिणामों को सहन करने को तैयार हैं। इन कमियों के लिए सुखबीर सिंह बादल को दोषी ठहराया गया था। नेताओं ने नव गठित शिरोमणि अकाली दल की भी घोषणा की।

Punjab News: श्री अकाल तख्त पर, शिरोमणि अकाली दल (बादल) से बागी पंथक गुट के अकाली नेताओं ने माफी मांगी। उसमें प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बीबी जगीर कौर, परमिंदर सिंह ढींडसा, सुरजीत सिंह रखड़ा और अन्य लोग उपस्थित थे।

प्रदेश में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान पार्टी प्रधान रहे सुखबीर बादल की अगुवाई में हुई चार बड़ी गलतियों के लिए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह से लिखित तौर से माफी मांगी है।

सोमवार को सुबह 11 बजे श्री अकाल तख्त सचिवालय में जत्थेदार रघबीर सिंह को चार पेजों का माफीनामा सौंपने के बाद, उक्त नेताओं ने श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष सुखबीर की अगुवाई के दौरान हुई भूलों को बख्श देने की भी घोषणा की।

इनके माफीनामा पर हस्ताक्षर

शिरोमणि अकाली दल के सरपरस्त सुखदेव सिंह ढींडसा खुद श्री अकाल तख्त साहिब पर नहीं पेश हुए, लेकिन उनके हस्ताक्षर जत्थेदार रघबीर सिंह को सौंपे गए माफीनामा में भी हैं।

इसमें प्रेम सिंह चंदूमाजरा, पूर्व एसजीपीसी प्रधान बीबी जगीर कौर, पूर्व अकाली मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा, पूर्व मंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा और रणधीर सिंह रखड़ा भी हस्ताक्षर किए गए हैं।

पंथक धडा: सजा भुगतने के लिए तैयार

बागी गुट के नेताओं ने जत्थेदार रघबीर सिंह को सौंपे माफीनामा में अतीत विशेषकर साल 2007-2017 की अकाली सरकार के दौरान हुई गलतियों के लिए श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा लगाई गई प्रत्येक धार्मिक सजा भुगतने की वचनबद्धता दोहराई है।

पंथक नेताओं ने कहा कि हम सभी की तरफ से हुई गलतियों के लिए माफी मांगते हैं। हम अकाली सरकार में काम करते हुए जो भी गलतियां कर चुके हैं, उनके लिए श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा दी गई सजा को पूरी विनम्रता और दिल से भुगतने के लिए तैयार हैं, ताकि हमारी आत्माएं इन गुनाहों से मुक्त हो सकें।

माफीनामा में आगे कहा गया है कि हम लोग चाहते हैं कि सजा भुगतने के बाद श्री अकालतख्त साहिब से आर्शीवाद लेकर निकट भविष्य में शिरोमणि अकाली दल का पुनर्गठन कर इसे पहले की तरह बुलंदियों पर पहुंचा सकें। ताकि हम श्री अकालतख्त साहिब, सिख पंथ और अकाली दल की निष्काम सेवा करने के लिए भविष्य में पंथ की सेवा कर सकें।

बागी धड़े ने ये गलतियां मानी

1. सिरसा के डेरा प्रमुख श्री गुरमीत राम रहीम सिंह को माफी देना।

2. 2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के लिए माफी मांगी गई है।

3. आईपीएस अधिकारी सुमैध सैनी को पंजाब का डीजीपी बनाने की गलती और मोहम्मद इजहार आलम की पत्नी को टिकट देने की गलती

4. अकाली सरकार के दौरान जनता से किए गए वादे के तहत झूठे पुलिस मुकाबलों की जांच के लिए एक आयोग का गठन करना, निष्पक्ष जांच न करने और पीडितों को न्याय देने में विफल रहने के लिए माफी।

“जल्द ही शिअद का नाम बनाकर काफिला बढाएंगे।”

प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि पंथक नेता जल्द ही नए शिरोमणि अकाली दल का गठन करेंगे और काफिले को आगे बढाएंगे।

चंदूमाजरा ने कहा कि बादल परिवार की परम्परा रही है कि जो भी सच्चाई उजागर करता है, उनके खिलाफ आवाज उठाता है, उसे पंथ विरोधी भाजपा का एजेंट बताया जाता है।

चंदुमाजरा- सुखबीर सिंह बादल बात नहीं मानी

एक अरसे के बाद माफी मांगने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने संबंधी पूछे गए सवाल के जवाब में चंदुमाजरा ने कहा कि देर आए दरुस्त आए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार में रहते हुए वह पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल से गलतियां ना करने की अपील दोहराते रहे थे, उन्हें सावधान करते रहे थे।

सुखबीर ने भी कई बार अकाली सरकार के दौरान हुई गलतियों के लिए श्री अकाल तख्त साहिब पर सामूहिक तौर पर पहुंचकर माफी मांगने की अपील की। किंतु उन्होंने किसी की कोई बात नहीं सुनी। जबकि हम सभी उस समय भी सरकार में थे, इसलिए माफी मांगने को तैयार थे।

उनका कहना था कि हम लोग सुखबीर को कहते रहे कि श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होकर अपनी गलतियों के लिए पश्चाताप करें और गुरमत मर्यादा के अनुसार माफी मांगें, लेकिन वरिष्ठ नेतृत्व इसके लिए राजी नहीं हुआ।

झूंदा कमेटी की रिपोर्ट हो लागू

इस बागी नेता ने सुखबीर बादल से झूंदा कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने की भी मांग की है। चंदूमाजरा ने बताया कि इसे 2022 में लागू करने की भी मांग की गई थी, लेकिन पार्टी अध्यक्ष ने ऐसा नहीं किया।

उन्होने कहा कि इसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि दस वर्ष की अवधि के बाद पार्टी अध्यक्ष को पुनः चुना नहीं जाएगा। यह रिपोर्ट ज़ूंदा कमेटी ने विधानसभा के 117 हलकों में 100 में सर्वेक्षण करने के बाद  यह रिपोर्ट तैयार की थी।।

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