Monday, July 20, 2026

AAP नेता प्रवीण राम: भाजपा का ‘कपास क्रांति मिशन’ किसानों के लिए नहीं, बल्कि नेताओं की जेब भरने का मिशन है

by Versha
AAP नेता प्रवीण राम: भाजपा का 'कपास क्रांति मिशन' किसानों के लिए नहीं, बल्कि नेताओं की जेब भरने का मिशन है

AAP नेता प्रवीण राम ने भाजपा के कपास क्रांति मिशन पर सवाल उठाते हुए इसे किसानों की बजाय नेताओं को फायदा पहुंचाने वाली योजना बताया।

बुवाई पूरी होने के बाद दूरी की शर्तें घोषित करना भाजपा के चहेतों से भ्रष्टाचार करवाने की चाल है: प्रवीण राम AAP

₹134 करोड़ किसानों को नहीं, भाजपा के नेताओं को जाएंगे: प्रवीण राम AAP

अगर वास्तव में कपास क्रांति करनी है तो अमेरिका से आने वाले कपास पर आयात शुल्क (टैक्स) बढ़ाइए: प्रवीण राम AAP

किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर करोड़ों रुपये का घोटाला करने की तैयारी कर रही है भाजपा सरकार: प्रवीण राम AAP

वर्तमान कपास का उचित दाम नहीं दे सकते और उत्पादन बढ़ाने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं: प्रवीण राम AAP

आम आदमी पार्टी के प्रदेश किसान मोर्चा अध्यक्ष प्रवीण राम ने भाजपा सरकार की नई कपास योजना पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि, जब जनता के हित से अधिक नेताओं का अपना हित प्रिय हो, तब जनता के पैसे को कैसे ठिकाने लगाया जाए, इसके लिए ऐसी अनुचित योजनाएँ लागू की जाती हैं। बाहर से ऐसा लगता है कि यह योजना जनता के हित के लिए है, लेकिन पर्दे के पीछे नेताओं और उनके चहेतों का हित सुरक्षित किया जाता है। हाल ही में सरकार द्वारा ‘मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी’ अर्थात ‘कपास क्रांति मिशन’ के अंतर्गत ₹134 करोड़ आवंटित करने की जो घोषणा की गई है, वह वास्तव में किसानों की क्रांति के लिए नहीं, बल्कि भाजपा के नेताओं की क्रांति के लिए है। इस योजना का समय ही संदेहास्पद है। सरकार की शर्त है कि जो किसान कपास के दो पौधों के बीच कम दूरी (90 × 30 सेंटीमीटर) रखेंगे, उन्हें प्रति हेक्टेयर ₹14,000 और जो 90 × 60 सेंटीमीटर की दूरी रखेंगे, उन्हें अधिकतम दो हेक्टेयर की सीमा तक प्रति हेक्टेयर ₹7,500 का मुआवजा दिया जाएगा। समझने वाली बात यह है कि गुजरात में अच्छी बारिश हो चुकी है और एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है। राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में किसानों ने बुवाई पूरी कर दी है। किसानों को कोई सपना तो नहीं आया था कि सरकार ऐसी कोई योजना लाने वाली है, इसलिए उन्होंने अपनी पारंपरिक पद्धति से बुवाई कर दी है।

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‘आप’ नेता प्रवीण राम ने आगे कहा कि अब जब बुवाई पूरी हो चुकी है, तो ऐसी योजना लाने का क्या अर्थ है? इसका सीधा मतलब यह है कि ये ₹134 करोड़ भाजपा के चहेते फर्जी आवेदन और कागजात तैयार करके हड़प जाएंगे। सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया जाएगा कि किसानों को करोड़ों रुपये दिए गए, लेकिन वास्तव में यह पैसा किसानों तक पहुँचने वाला ही नहीं है। सरकार का तर्क है कि इससे कपास का उत्पादन बढ़ेगा, भारत का आयात घटेगा और किसान समृद्ध होंगे। मेरा सरकार से सवाल है कि आज किसान जितनी कपास पैदा कर रहे हैं, उसका भी आप उचित मूल्य नहीं दे पा रहे हैं, किसान कर्ज में डूबे हुए हैं, फिर भी आप अधिक उत्पादन के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं! यदि सरकार वास्तव में कपास उत्पादकों का भला करना चाहती है, तो अमेरिका से शून्य प्रतिशत टैक्स पर आयात किए जा रहे कपास पर तत्काल टैक्स (आयात शुल्क) बढ़ाना चाहिए। यदि बाहर से आने वाला कपास महंगा होगा, तो देश के किसानों की कपास के दाम अपने आप बढ़ जाएंगे और अच्छा भाव मिलने पर किसान स्वयं अधिक बुवाई करेंगे। लेकिन सरकार का मिशन ‘कपास क्रांति’ नहीं है, उनका असली मिशन ‘जेब भरो मिशन’ है। किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर किए जा रहे इस भ्रष्टाचार को गुजरात का किसान कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। पानी निकल जाने के बाद बाँध बनाने निकली यह सरकार किसानों की आँखों में धूल झोंकना बंद करे।

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