Saturday, July 25, 2026

पितृ पक्ष 2026: कब से शुरू होंगे श्राद्ध? नोट करें पूरी तिथियां और नियम

by Neha
पितृ पक्ष 2026: कब से शुरू होंगे श्राद्ध? नोट करें पूरी तिथियां और नियम

पितृ पक्ष 2026 की पूरी जानकारी, श्राद्ध की तिथियां, शुरुआत और समापन की तारीखें, महत्व और नियम जानें। पितृ पक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक, सर्वपितृ अमावस्या सहित सभी महत्वपूर्ण विवरण यहां देखें।

पितृ पक्ष 2026: पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने का विशेष 15 दिवसीय काल माना जाता है। इस अवधि में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं। मान्यता है कि इन दिनों पितर पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए तर्पण को स्वीकार कर आशीर्वाद देते हैं।

पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू होंगे?

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 (शनिवार) से मानी जा रही है और इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा।

कुछ मान्यताओं और पंचांग भिन्नताओं के अनुसार इसकी शुरुआत 29 सितंबर से भी बताई जाती है, लेकिन प्रमुख रूप से 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक का

समय पितृ पक्ष माना जाएगा।

पितृ पक्ष 2026 की श्राद्ध तिथियां (पूरी सूची)
26 सितंबर 2026 – पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर 2026 – प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर 2026 – द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर 2026 – तृतीया श्राद्ध एवं महा भरणी श्राद्ध
30 सितंबर 2026 – चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2026 – षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2026 – सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2026 – अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2026 – नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर 2026 – दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2026 – एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2026 – द्वादशी एवं मघा श्राद्ध
8 अक्टूबर 2026 – त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर 2026 – चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर 2026 – सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध

also read: गंगा दशहरा 2026: 25 मई को मनाया जाएगा गंगा दशहरा, जानें…

पितृ पक्ष का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख, समृद्धि, संतान, दीर्घायु और शांति का आशीर्वाद देते हैं। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, श्राद्ध से तृप्त होकर पितृगण अपने वंशजों को सुख, धन, विद्या और मोक्ष तक प्रदान करते हैं। इसलिए यह समय पितृ ऋण से मुक्ति का भी माना जाता है।

सर्वपितृ अमावस्या क्यों है खास?

यदि किसी पितर की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है। इसे महालय अमावस्या भी कहा जाता है। यह दिन पूरे पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

पितृ पक्ष में क्या नहीं करना चाहिए?

पितृ पक्ष को सादगी और संयम का समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है:

  • विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और उपनयन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते
  • नए वस्त्र, वाहन या आभूषण की खरीदारी से बचा जाता है
  • भव्य उत्सव या शुभ आयोजन टाले जाते हैं

श्राद्ध के दिन क्या सावधानियां रखें?

  • श्राद्ध का समय दिन के शुभ मुहूर्त (कुतप काल) में करना श्रेष्ठ माना जाता है
  • कुतप काल लगभग 11:36 से 12:24 बजे तक माना जाता है
  • इस समय किया गया दान और तर्पण अक्षय फलदायी माना जाता है
  • श्राद्ध के दिन तामसिक भोजन, तेल मालिश, और कुछ शारीरिक सुख-सुविधाओं से बचने की परंपरा है
  • श्राद्ध शाम या रात्रि में करना वर्जित माना गया है

You may also like

‘मेरा कुत्ता आ जाता…’ पति से मुलाकात के बाद आकांक्षा चमोला के बयान पर मचा बवाल क्या खत्म होने वाली है 20 साल की शादी? 3 बेटियों के पिता करणवीर बोहरा ने तलाक की अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी ‘मेरे पापा भी ऐसा नहीं करते’… राम कपूर पर श्रेया कालरा का फूटा गुस्सा ‘अगर ये सच बतातीं तो बिग बॉस नहीं जीततीं’ – हिना खान का बड़ा दावा क्या हिंदू लड़की मुस्लिम दोस्त नहीं बना सकती? सैफी संग रिश्ते का बताया सच