Sunday, August 23, 2026

निर्जला एकादशी 2026: 24 या 25 जून कब है निर्जला एकादशी? जानें सही व्रत तिथि और पूजा मुहूर्त

by Neha
निर्जला एकादशी 2026: 24 या 25 जून कब है निर्जला एकादशी? जानें सही व्रत तिथि और पूजा मुहूर्त

निर्जला एकादशी 2026 की सही तिथि 24 या 25 जून जानें, व्रत-पूजन का शुभ मुहूर्त, पारण समय और भगवान विष्णु की पूजा विधि पूरी जानकारी।

निर्जला एकादशी 2026: साल 2026 की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक निर्जला एकादशी इस बार 24 और 25 जून को लेकर भ्रम की स्थिति बना रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस पवित्र व्रत की तिथि दो दिनों में फैली हुई दिखाई दे रही है, लेकिन व्रत-पूजन और पालन के लिए सही दिन का निर्धारण जरूरी है।

निर्जला एकादशी 2026 की तिथि कब है?

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून 2026 को शाम 6:12 बजे शुरू होगी और 25 जून 2026 को रात 8:09 बजे समाप्त होगी।

हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत का आरंभ सूर्योदय से माना जाता है, इसलिए व्रत-पूजन के लिए 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का मुख्य दिन श्रेष्ठ माना गया है।

व्रत-पूजन का शुभ मुहूर्त

निर्जला एकादशी 2026 पर पूजा के लिए शुभ समय सुबह 10:39 बजे से दोपहर 2:05 बजे तक बताया गया है। इस अवधि में भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जप और दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।

पारण (व्रत खोलने) का समय

निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून 2026 को सुबह 5:25 बजे से 8:13 बजे के बीच किया जाएगा। द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय रात 10:22 बजे बताया गया है।

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निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व

निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे कठिन और श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन बिना जल के व्रत करने से पूरे वर्ष की 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

यह व्रत संयम, तप और त्याग का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है।

व्रत के नियम और विशेष महत्व

निर्जला एकादशी के दिन यदि स्वास्थ्य कारणों से कठिनाई हो तो जलाहार या अल्पाहार लिया जा सकता है। व्रत के दौरान संयम और नियमों का पालन आवश्यक माना जाता है।

भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र

निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए निम्न मंत्रों का जप शुभ माना जाता है:

  • ॐ नमो नारायणाय
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • विष्णु गायत्री मंत्र
  • शान्ताकारम् मंत्र

पूजा विधि और दान का महत्व

इस दिन स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए। पंचामृत से अभिषेक, मंत्र जप और क्षमा याचना करना शुभ माना जाता है।

पूजा के बाद गाय, ब्राह्मण और जरूरतमंदों को दान देना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। पीले वस्त्र, फल, मिठाई, चना, हल्दी और केसर का दान विशेष फल देता है।

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