मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा में आयोजित CPA बैठक संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने और जनप्रतिनिधियों को नए अनुभव देने का महत्वपूर्ण मंच बनेगी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य में आयोजित हो रही कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) इंडिया रीजन जोन-2 की बैठक हरियाणा के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन संसदीय लोकतंत्र को और मजबूत बनाने के साथ-साथ विधायी कार्यों में नई सोच और नई दिशा प्रदान करेगा।
राष्ट्रीय स्तर के जनप्रतिनिधियों का होगा विचार-मंथन
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों से आए जनप्रतिनिधियों की भागीदारी इस सम्मेलन को विशेष महत्व प्रदान करती है। ऐसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और जनप्रतिनिधियों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर उपलब्ध कराते हैं।
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संसदीय लोकतंत्र को मिलेगी मजबूती
नायब सिंह सैनी ने कहा कि CPA बैठक लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस दौरान विभिन्न विधायी विषयों और समकालीन चुनौतियों पर चर्चा होगी, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
सांसदों और विधायकों को मिलेगा नया अनुभव
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस सम्मेलन के माध्यम से सांसदों और विधायकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के संसदीय अनुभवों से सीखने का अवसर मिलेगा। इससे जनप्रतिनिधियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और वे अपने क्षेत्रों में बेहतर ढंग से जनता की अपेक्षाओं को पूरा कर सकेंगे।
“हरियाणा में इस बार आयोजित हो रही कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) की बैठक प्रदेश के लिए बेहद गौरव की बात है। लोकसभा अध्यक्ष श्री @ombirlakota के मार्गदर्शन में तथा देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों की सहभागिता से यह आयोजन और भी महत्वपूर्ण बन गया है। यह बैठक… pic.twitter.com/1mgI3X361k
— DPR Haryana (@DiprHaryana) June 9, 2026
विकसित लोकतंत्र की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा। CPA जैसे मंच जनप्रतिनिधियों को नई कार्यशैली, बेहतर प्रशासनिक दृष्टिकोण और जनहितकारी निर्णयों की समझ विकसित करने में मदद करते हैं।
हरियाणा की बढ़ी राष्ट्रीय पहचान
नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस प्रतिष्ठित सम्मेलन की मेजबानी से हरियाणा की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। साथ ही यह आयोजन राज्य को लोकतांत्रिक संवाद और संसदीय परंपराओं के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध होगा।