Sunday, August 23, 2026

मुहर्रम 2026: मुहर्रम कब है? 16 या 17 जून, जानें नया चांद और आशूरा की तारीख

by Neha
मुहर्रम 2026: मुहर्रम कब है? 16 या 17 जून, जानें नया चांद और आशूरा की तारीख

मुहर्रम 2026 कब है? जानें इस्लामिक नए साल की शुरुआत, 16 या 17 जून में मुहर्रम की संभावित तारीख, नया चांद (हिलाल) कब दिखेगा और यौम-ए-आशूरा 2026 की सही जानकारी।

मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है और इसे रमजान के बाद दूसरा सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने से इस्लामी नव वर्ष की शुरुआत होती है। मुहर्रम का निर्धारण चंद्रमा के दिखाई देने यानी “हिलाल” पर आधारित होता है, इसलिए इसकी सटीक तारीख हर साल चांद दिखने के बाद ही तय की जाती है।

मुहर्रम 2026 कब है?

साल 2026 में मुहर्रम की शुरुआत 16 या 17 जून के आसपास होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि यह पूरी तरह से नए चांद (हिलाल) के दिखाई देने पर निर्भर करेगा। अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में चांद दिखने के समय में अंतर होने के कारण मुहर्रम की तारीख में एक दिन का फर्क भी हो सकता है।

यदि 16 जून 2026 को चांद नजर आ जाता है, तो उसी के अनुसार इस्लामिक नव वर्ष की शुरुआत मानी जाएगी। वहीं अगर उस दिन चांद नहीं दिखता है, तो मुहर्रम की शुरुआत 17 जून 2026 से मानी जा सकती है।

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मुहर्रम और यौम-ए-आशूरा कब है?

मुहर्रम की 10वीं तारीख को “यौम-ए-आशूरा” मनाया जाता है, जिसका इस्लाम में विशेष महत्व है। अनुमान के अनुसार:

  • यदि मुहर्रम 16 जून से शुरू होता है, तो आशूरा 25 जून 2026 को पड़ सकता है।
  • यदि मुहर्रम 17 जून से शुरू होता है, तो आशूरा 26 जून 2026 को मनाया जा सकता है।

हालांकि यह भी चांद दिखने की पुष्टि के बाद ही अंतिम रूप से तय होगा।

यौम-ए-आशूरा का महत्व

“आशूरा” शब्द का अर्थ होता है “दसवां दिन”। इस दिन मुस्लिम समुदाय, विशेषकर शिया मुस्लिम, पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं।

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष किया था और अपने परिवार व साथियों के साथ शहीद हुए थे। उनकी यह कुर्बानी सत्य, न्याय और इंसानियत के लिए सबसे बड़ा बलिदान मानी जाती है।

मुहर्रम में आयोजन

मुहर्रम के दौरान कई जगहों पर ताजिया जुलूस निकाले जाते हैं और मजलिसों का आयोजन किया जाता है। यह समय शोक, श्रद्धा और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करने का होता है। मुस्लिम समुदाय इस महीने को गहरे सम्मान और धार्मिक भावनाओं के साथ मनाता है।

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