Friday, July 24, 2026

May 2026 Ekadashi: मई में अपरा और पद्मिनी एकादशी कब है? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

by Neha
May 2026 Ekadashi: मई में अपरा और पद्मिनी एकादशी कब है? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

May 2026 Ekadashi: मई में अपरा एकादशी और पद्मिनी एकादशी का खास संयोग बन रहा है। जानें सही डेट, पूजा मुहूर्त, पारण समय और धार्मिक महत्व।

May 2026 Ekadashi: मई 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान ज्येष्ठ माह और अधिकमास का अनोखा संयोग बन रहा है। इस वजह से भक्तों को एक ही महीने में दो महत्वपूर्ण एकादशी व्रत – अपरा एकादशी और पद्मिनी एकादशी – करने का अवसर मिलेगा। हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व होता है, खासकर इस दिन व्रत और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है।

अपरा एकादशी 2026: तिथि, मुहूर्त और पारण समय

  • तारीख: 13 मई 2026 (बुधवार)
  • तिथि प्रारंभ: 12 मई, दोपहर 2:52 बजे
  • तिथि समाप्त: 13 मई, दोपहर 1:29 बजे

पूजा मुहूर्त:
सुबह 5:32 बजे से 8:55 बजे तक

व्रत पारण समय:
14 मई 2026 को सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक (द्वादशी समाप्ति: सुबह 11:20 बजे)

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अपरा एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से बड़े से बड़े पापों से मुक्ति मिलती है और अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। यह व्रत व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धि, पितरों की तृप्ति और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

पद्मिनी एकादशी 2026: तिथि, मुहूर्त और पारण समय

  • तारीख: 27 मई 2026 (बुधवार)
  • तिथि प्रारंभ: 26 मई, सुबह 5:10 बजे
  • तिथि समाप्त: 27 मई, सुबह 6:21 बजे

पूजा मुहूर्त: सुबह 5:25 बजे से 8:52 बजे तक

व्रत पारण समय: 28 मई 2026 को सुबह 5:25 बजे से 7:56 बजे तक

पद्मिनी एकादशी का महत्व

अधिकमास में आने वाली पद्मिनी एकादशी को अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यह व्रत सभी पापों को नष्ट करता है और मनोकामनाओं की पूर्ति करता है। इस व्रत को करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि बढ़ती है, साथ ही मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व

एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन उपवास, पूजा और दान करने से मानसिक शांति, आत्मिक शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। विशेष रूप से ज्येष्ठ माह में जल का दान अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है, जो कई जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है।

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