चौधरी लक्ष्मीनारायण ने कहा कि पहले गन्ने से इथेनॉल से बनाया जाएगा और गन्ने की कमी के बाद मक्का और धान से इथेनॉल बनाया जाएगा।
अब उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक इथेनॉल प्लांट बनाया जाएगा, जो वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिल में 3.96 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन करेगा। मंगलवार को मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में 23 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
19 साल पहले छाता की चीनी मिल बंद हुई
लोकभवन में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की मौजूदगी में गन्ना विकास एवं चीनी मिल मामलों के मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने बताया कि 19 साल पहले मथुरा के छाता में स्थित चीनी मिल बंद हो गई थी। मंत्रिमंडल ने वहां इथेनॉल प्लांट बनाने की अनुमति दी है, जो धान, मक्का और गन्ना से उत्पादित होगा।
also read: डोनाल्ड ट्रंप ने रूस की रिफाइनरियों पर हमले को रोकने के…
इथेनॉल प्लांट 1 साल में 11 महीने चलेगा
चौधरी लक्ष्मीनारायण ने कहा कि इथेनॉल पहले गन्ने से बनाया जाएगा और गन्ने की कमी के बाद मक्का और धान से बनाया जाएगा। ये प्लांट कुल 3.96 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन करेगा और एक वर्ष में ग्यारह महीने चलेगा। मंत्री ने कहा कि इस प्लांट की स्थापना करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत होगी।
गोदाम, परिसर निर्माण की भी योजना
मंत्री ने इथेनॉल प्लांट की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए कहा, “मथुरा का छाता नेशनल हाईवे पर स्थित है और वहां से नोएडा एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल तक की दूरी मुश्किल से 40 मिनट की है, इसलिए इस प्रोजेक्ट में और भी ज्यादा संभावनाएं हैं।”उन्होंने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत भवन और क्षेत्र भी बनाने की योजना है। इसके लिए 96 एकड़ जमीन उपलब्ध है, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को काम मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी इस साल इथेनॉल प्लांट का शिलान्यास करेंगे
मंत्री ने कहा कि इसी साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इथेनॉल प्लांट का शिलान्यास करेंगे। एक सवाल के जवाब में, गन्ना विकास एवं चीनी मिल मामलों के मंत्री ने कहा कि 45 से 50 लाख क्विंटल गन्ना चाहिए, इसलिए गन्ने से इथेनॉल बनाया जाएगा और गन्ना खत्म होने पर धान और मक्का का उत्पादन होगा।
यूपी सरकार के मंत्री ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाए
चौधरी लक्ष्मीनारायण ने बताया कि पिछले दो वर्षों से वहां गन्ने की खरीददारी के तीन स्थान हैं। चीनी मिल को 19 साल पहले बंद करने का आरोप उन्होंने समाजवादी पार्टी सरकार पर लगाया। 2002 से 2007 तक, SP सरकार ने किसानों को एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया और 5 साल तक भुगतान न होने के कारण चीनी मिलों को बंद कर दिया।