Saturday, April 18, 2026

जया एकादशी 2026: जपें ये पवित्र मंत्र और पाएं सभी कष्टों से मुक्ति

by Neha
जया एकादशी 2026: जपें ये पवित्र मंत्र और पाएं सभी कष्टों से मुक्ति

जया एकादशी 2026: जानें 29 जनवरी गुरुवार को पड़ने वाली जया एकादशी का महत्व, व्रत विधि, भगवान कृष्ण के 108 नामों का जप और सभी पापों से मुक्ति पाने के आसान उपाय।

हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस साल, जया एकादशी 29 जनवरी 2026, गुरुवार को पड़ रही है, जो इसे और भी विशेष बनाता है क्योंकि गुरुवार का दिन भी भगवान विष्णु को समर्पित होता है।

जया एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। जया एकादशी व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और उसे पिशाच योनि जैसी बुरी परिस्थितियों से मुक्ति मिलती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति आती है।

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जया एकादशी 2026 पर करें ये उपाय

विशेष रूप से इस दिन भगवान कृष्ण के 108 नामों का जप अत्यंत फलदायी माना गया है। यह साधना न केवल आध्यात्मिक उन्नति देती है, बल्कि जीवन के सभी कष्टों को भी दूर करती है।

व्रत और पूजा विधि

  • जया एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।

  • भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत करें।

  • भगवान कृष्ण के 108 नामों का जप करें।

  • दिनभर शुद्ध आहार का सेवन करें और उपवास का पालन करें।

।।कृष्ण जी के 108 नाम।।

1. ॐ कृष्णाय नमः

2. ॐ कमलानाथाय नमः

3. ॐ वासुदेवाय नमः

4. ॐ सनातनाय नमः

5. ॐ वसुदेवात्मजाय नमः

6. ॐ पुण्याय नमः

7. ॐ लीलामानुष विग्रहाय नमः

8. ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः

9. ॐ यशोदावत्सलाय नमः

10. ॐ हरिये नमः

11. ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदा नमः

12. ॐ शङ्खाम्बुजायुधाय नमः

13. ॐ देवकीनन्दनाय नमः

14. ॐ श्रीशाय नमः

15. ॐ नन्दगोपप्रियात्मजाय नमः

16. ॐ यमुनावेगसंहारिणे नमः

17. ॐ बलभद्रप्रियानुजाय नमः

18. ॐ पूतनाजीवितहराय नमः

19. ॐ शकटासुरभञ्जनाय नमः

20. ॐ नन्दव्रजजनानन्दिने नमः

21. ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः

22. ॐ नवनीतविलिप्ताङ्गाय नमः

23. ॐ नवनीतनटनाय नमः

24. ॐ मुचुकुन्दप्रसादकाय नमः

25. ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नमः

26. ॐ त्रिभङ्गिने नमः

27. ॐ मधुराकृतये नमः

28. ॐ शुकवागमृताब्धीन्दवे नमः

29. ॐ गोविन्दाय नमः

30. ॐ योगिनांपतये नमः

31. ॐ वत्सवाटचराय नमः

32. ॐ अनन्ताय नमः

33. ॐ धेनुकासुरभञ्जनाय नमः

34. ॐ तृणीकृत तृणावर्ताय नमः

35. ॐ यमलार्जुनभञ्जनाय नमः

36. ॐ उत्तलोत्तालभेत्रे नमः

37. ॐ तमालश्यामलाकृतिये नमः

38. ॐ गोपगोपीश्वराय नमः

39. ॐ योगिने नमः

40. ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः

41. ॐ इलापतये नमः

42. ॐ परंज्योतिषे नमः

43. ॐ यादवेंद्राय नमः

44. ॐ यदूद्वहाय नमः

45. ॐ वनमालिने नमः

46. ॐ पीतवसने नमः

47. ॐ पारिजातापहारकाय नमः

48. ॐ गोवर्थनाचलोद्धर्त्रे नमः

49. ॐ गोपालाय नमः

50. ॐ सर्वपालकाय नमः

51. ॐ अजाय नमः

52. ॐ निरञ्जनाय नमः

53. ॐ कामजनकाय नमः

54. ॐ कञ्जलोचनाय नमः

55. ॐ मधुघ्ने नमः

56. ॐ मथुरानाथाय नमः

57. ॐ द्वारकानायकाय नमः

58. ॐ बलिने नमः

59. ॐ बृन्दावनान्त सञ्चारिणे नमः

60. ॐ तुलसीदाम भूषनाय नमः

61. ॐ स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे नमः

62. ॐ नरनारयणात्मकाय नमः

63. ॐ कुब्जा कृष्णाम्बरधराय नमः

64. ॐ मायिने नमः

65. ॐ परमपुरुषाय नमः

66. ॐ मुष्टिकासुर चाणूर मल्लयुद्ध विशारदाय नमः

67. ॐ संसारवैरिणे नमः

68. ॐ कंसारये नमः

69. ॐ मुरारये नमः

70. ॐ नाराकान्तकाय नमः

71. ॐ अनादि ब्रह्मचारिणे नमः

72. ॐ कृष्णाव्यसन कर्शकाय नमः

73. ॐ शिशुपालशिरश्छेत्रे नमः

74. ॐ दुर्योधनकुलान्तकाय नमः

75. ॐ विदुराक्रूर वरदाय नमः

76. ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमः

77. ॐ सत्यवाचे नमः

78. ॐ सत्य सङ्कल्पाय नमः

79. ॐ सत्यभामारताय नमः

80. ॐ जयिने नमः

81. ॐ सुभद्रा पूर्वजाय नमः

82. ॐ विष्णवे नमः

83. ॐ भीष्ममुक्ति प्रदायकाय नमः

84. ॐ जगद्गुरवे नमः

85. ॐ जगन्नाथाय नमः

86. ॐ वेणुनाद विशारदाय नमः

87. ॐ वृषभासुर विध्वंसिने नमः

88. ॐ बाणासुर करान्तकाय नमः

89. ॐ युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे नमः

90. ॐ बर्हिबर्हावतंसकाय नमः

91. ॐ पार्थसारथये नमः

92. ॐ अव्यक्ताय नमः

93. ॐ गीतामृत महोदधये नमः

94. ॐ कालीय फणिमाणिक्य रञ्जित श्री पदाम्बुजाय नमः

95. ॐ दामोदराय नमः

96. ॐ यज्ञभोक्त्रे नमः

97. ॐ दानवेन्द्र विनाशकाय नमः

98. ॐ नारायणाय नमः

99. ॐ परब्रह्मणे नमः

100. ॐ पन्नगाशन वाहनाय नमः

101. ॐ जलक्रीडा समासक्त गोपीवस्त्रापहाराकाय नमः

102. ॐ पुण्य श्लोकाय नमः

103. ॐ तीर्थकृते नमः

104. ॐ वेदवेद्याय नमः

105. ॐ दयानिधये नमः

106. ॐ सर्वभूतात्मकाय नमः

107. ॐ सर्वग्रह रुपिणे नमः

108. ॐ परात्पराय नमः

इस प्रकार, जया एकादशी 2026 को सही विधि से व्रत और जप करने से जीवन में सभी बाधाएं दूर होती हैं और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

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