अपने घर की माता, बहनों और बेटियों को लेकर आइए और अगर वे जन्माष्टमी के दिन यहां रामधुन करें तो उसकी गूंज मुख्यमंत्री तक पहुंच सकती है: इसुदान गढ़वी
आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष और किसान नेता इसुदान गढ़वी जामखंभालिया में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, जिसका आज तीसरा दिन था। चार मुख्य मांगों के साथ इसुदान गढ़वी धरने पर बैठे थे और उनके साथ हजारों से अधिक किसान इस कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्हें समर्थन दिया। फिलहाल सरकार ने दो जिलों में पानी छोड़ने का फैसला लिया है, जिसे इस सत्याग्रह की आंशिक जीत कहा जा सकता है। जिसके कारण उम्मीद है कि आने वाले समय में सरकार सभी मांगें पूरी करेगी। इस कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी के साथ प्रदेश संगठन महामंत्री मनोज सोरठिया, विधायक हेमंत खवा, किसान सेल के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण राम, युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ब्रिजराज सोलंकी, प्रदेश संगठन मंत्री राजू बोरखतरिया और महिला नेता जिगीषा पटेल सहित बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। किसानों और आम आदमी पार्टी के सभी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखीं और सूखाग्रस्त क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की।
“दुष्काल घोषणा सत्याग्रह” में किसान नेता इसुदान गढ़वी ने बताया कि, पूरे गुजरात से किसान धरने के कार्यक्रम में आ रहे हैं। यहां के किसानों की आवाज मजबूती से सरकार तक पहुंचे और हर किसान के खाते में 50000 या एक लाख रुपये पहुंचे तथा उनका छह महीने का गुजारा हो सके, इसलिए ये सभी लोग यहां एकत्र हुए हैं। इस क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों से कोई आंदोलन नहीं हुआ है। आज वरुणदेव को प्रसन्न करने के लिए हवन का आयोजन किया गया था, उसमें मैं और प्रवीणभाई गए थे। इस सत्याग्रह में सभी जाति-समुदाय के लोग जुड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री किसान का बेटा होता तो किसानों की मदद करता। कई भाजपा नेता टिकट के कारण कुछ नहीं बोलते, लेकिन मैं तो कहता हूं कि किसानों के लिए जान देनी पड़े तो उसकी भी परवाह न करे, उसे नेता कहा जाता है। हम कोई राजनीति करने नहीं आए हैं। मैं द्वारका जिले का निवासी हूं और पोरबंदर तथा जामनगर का ऋणी हूं, लेकिन अगर किसी दूसरे जिले में भी किसानों को तकलीफ होती तो मैं उनके जिले में भी धरने पर बैठ जाता। मैं किसानों से पूछना चाहता हूं कि यह तो मानसून है, आप सर्दियों में क्या करेंगे। मैं कई किसानों से कहना चाहता हूं कि आप आज नहीं आएंगे तो कल आना पड़ेगा, कल नहीं आएंगे तो परसों आना पड़ेगा। मैं आज एक गांव में गया था, उस गांव के चौक में 25 लोग बैठे थे और मुझे आंदोलन करने के लिए बधाई दे रहे थे, लेकिन मेरा उनसे सवाल है कि क्या आप वहीं बैठे रहेंगे? बुधवार को जब कैबिनेट की मीटिंग होगी, तब वे चर्चा करेंगे कि आंदोलन में कितने लोग थे और अगर उन्हें लगा कि भीड़ कम है तो कोई सहायता नहीं देंगे, लेकिन अगर यहां 50000 लोग होते तो वे किसानों की मांगें मानने के लिए राजी हो जाते।
आगे किसान नेता इसुदान गढ़वी ने बताया कि, किसानों को पूरा साल निकालना है और अगर गलती से भी एक नहीं हुए तो 54 लाख किसानों के बच्चों की आंतें भूख से तड़पेंगी, उसके पाप के भागीदार आप बनेंगे। अब तो पेट्रोल के भी पैसे नहीं बचेंगे, अब लोगों को चाय पिलानी होगी तो 80 रुपये की चीनी हो गई है तो कहां जाएंगे। मैं इस बार इतना कहना चाहता हूं कि किसानों आप जागो और 10 और लोगों को जगाओ। इन लोगों को यही चाहिए कि हम एक न हों। अगर अधिक किसान कार्यक्रम में आएं तो विधायक, तालुका पंचायत और जिला पंचायत के सदस्य भी मुख्यमंत्री के सामने जाकर मांग रख सकते हैं कि अगर किसानों की बात नहीं सुनेंगे तो हमें कहीं निकलने भी नहीं देंगे। और मुख्यमंत्री का भी कुछ नहीं चलता, उन्हें कुछ कहो तो वे दिल्ली चले जाते हैं। कई लोग नहीं आ रहे हैं, उनसे मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि आप क्यों डर रहे हैं, हमने गुलामी करने के लिए जन्म नहीं लिया है। नाकारा सरपंच नहीं बनना चाहिए, नाकारा तालुका पंचायत के सदस्य नहीं बनना चाहिए, नाकारा जिला पंचायत के सदस्य नहीं बनना चाहिए, नाकारा विधायक नहीं बनना चाहिए और अगर राजनीति करनी है तो डंके की चोट पर करनी चाहिए।
आगे किसान नेता इसुदान गढ़वी ने बताया कि, जो लोग जेल में डालने की धमकी देते हैं, उनसे इतना ही कहना चाहता हूं कि भगवान कृष्ण का जन्म भी जेल में हुआ था और अगर जेल जाने की नौबत आएगी तो इसुदान गढ़वी सबसे पहले जेल जाएगा। मुझे पता है कि अगर भाजपा सरकार किसी को जेल में डालेगी तो सामूहिक रूप से हाथ में पानी रखकर शपथ ले सकते हैं कि जीवनभर भाजपा को वोट नहीं देंगे। आप लोग यह समझ रहे हैं कि आप किसानों को डरा देंगे, मैं तो घर-घर जाऊंगा। भाजपा के लोग पुलिस की धमकी दे सकते हैं। पासा, तड़ीपार की भी धमकी देते हैं लेकिन मैं विश्वास दिलाता हूं कि इन सभी कार्यक्रमों के कारण किसी पर पासा या तड़ीपार नहीं होगा। और यहां पुलिस आए और कुछ होता है तो सुप्रीम कोर्ट तक इसुदान गढ़वी आपके लिए वकील रखेगा, इसलिए किसी को डरने की जरूरत नहीं है। मैं तो कमजोर नहीं हूं क्योंकि मेरे द्वारकाधीश का जन्म तो जेल में ही हुआ था तो मैं कैसे कमजोर होऊं। अगर आप अपने घर की माता, बहनों और बेटियों को लेकर आएं और वे जन्माष्टमी के दिन यहां रामधुन और भजन करें तो उसकी गूंज मुख्यमंत्री तक पहुंच सकती है। तो मेरी अपील है कि किसान अधिक से अधिक संख्या में आएं और अपने परिवार के साथ आएं।
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आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन अध्यक्ष मनोज सोरठिया ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि, नहरों में पानी छुड़वाने के लिए सत्याग्रह शुरू करने वाले इसुदान गढ़वी और सभी किसानों को बधाई देता हूं। अगर हमारा सत्याग्रह जारी रहेगा और सौराष्ट्र तथा गुजरात के किसान एकजुट होकर लड़ते रहेंगे तो हमारी मांगें स्वीकार की जाएंगी और हमें हमारे अधिकार मिलकर रहेंगे। इस सरकार को सत्ता का इतना अहंकार है कि लोगों की बात, भावना और पीड़ा उनके कानों और हृदय तक नहीं पहुंचती। गुजरात में खंभा विरोध, पाइपलाइन, कंपनियों की रणझाड़ या बायपास के विरोध के आंदोलन हों, सरकार ने कभी किसी की नहीं सुनी। आज भी देश में 60 प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर होने के बावजूद और इतने वर्षों की शासन व्यवस्था के बावजूद किसान लाचारी झेल रहे हैं। आम किसान अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए जमीन बेचकर परीक्षाएं दिलवाता है, लेकिन पिछले 15 वर्षों में लगातार पेपर लीक करके युवाओं की नौकरियां छीनने का काम इस सरकार ने किया है। 30 वर्षों से शासन में होने के बावजूद गांवों में शिक्षा या प्राथमिक सुविधाओं की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है क्योंकि यह सरकार गांव विरोधी और किसान विरोधी है। कार्यालयों में बैठे अधिकारी किसानों को कुछ नहीं समझते, इसलिए जब तक कलेक्टर कार्यालय में किसान के आने पर कलेक्टर अपनी कुर्सी से उठकर किसान का काम नहीं कर देता, तब तक यह व्यवस्था बदलने वाली नहीं है। द्वारका जिले के खंभालिया में चल रही यह सत्याग्रह छावनी केवल सूखे या पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता में बैठे तानाशाह लोगों के कान और दिमाग खोलने की शुरुआत है। और जनता 2027 के चुनाव में इस व्यवस्था को बदलकर किसानों का भला करने वाले नए नेताओं को लाएगी।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश फ्रंटल अध्यक्ष और किसान मोर्चा के अध्यक्ष प्रवीण राम ने बताया कि, जेल की अंदरूनी दुनिया और बैरक की व्यवस्था बिल्कुल अलग होती है। सुबह छह बजे सिपाही आता है और ‘बंदी खुले’ कहते ही सभी को दो-दो की लाइन (‘जोड़ी-जोड़ी’) में व्यवस्थित होना पड़ता है, जहां सिपाही गिनती करके हाजिरी पूरी करता है। छह से बारह बजे तक नीचे के क्षेत्र में चक्कर लगाए जा सकते हैं, लेकिन बाहर की दुनिया दिखाई नहीं देती। दोपहर बारह से तीन बजे तक और फिर शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक बैरक में ही रहना होता है। वहां साथ रहने वाले 35-40 लोग ही आपका परिवार और सुख-दुख के साथी बन जाते हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से लोगों के लिए लड़कर दो बार जेल भुगत चुका हूं और बहुत पीड़ा भी सहन की है। दुनिया में जो भाग्यशाली लोग होते हैं, उन्हें ही लोगों के लिए लड़ते-लड़ते जेल होती है। जेल हो जाए तो कैसे चलना है और कैसे लड़ाई लड़नी है, यह समझ में आ जाता है। कई बार समाज में जेल का गलत डर पैदा किया जाता है, लेकिन जनता के लिए लड़ते समय जेल के डर से कोई नहीं डरता। इससे इंसान का मनोबल और मजबूत होता है, फिर उसे कोई डरा या हरा नहीं सकता। जेल में सभी साथ मिलकर खाना खाते हैं, उसे ‘हांडीकार’ कहा जाता है और जेल में पैसों के पेड़ होने की बातें भी रोचक हैं। आज मैं उस समय मेरे साथ जेल गए किसानों को याद करता हूं और बधाई देता हूं। 108 दिन जेल में रहने के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत हारकर बाहर निकालने की गुहार नहीं लगाई थी। हमने उनसे कहा था कि डरने की जरूरत नहीं है, हम बैठे हैं और लड़ेंगे। उन सभी किसान भाइयों के हौसले को मैं सलाम करता हूं।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश युवा मोर्चा अध्यक्ष ब्रिजराज सोलंकी ने बताया कि, मांगने से केवल भीख मिलती है; अगर हमें अपना हक और अधिकार चाहिए तो सामने वाले के खिलाफ मजबूती से लड़कर छीन लेने की ताकत होनी चाहिए। इस लड़ाई का माध्यम बनकर पूरे गुजरात में इसुदान गढ़वी ने सत्याग्रह की शुरुआत की है। ईश्वर उन्हें बहुत शक्ति और मनोबल दे कि उन्होंने अकेले ही इतना बड़ा काम उठाया है। सत्याग्रह के पहले ही दिन अगर इस सरकार को झुकना पड़ा है तो वह इसुदान गढ़वी के दृढ़ मनोबल और हजारों किसानों के एकजुट संघर्ष के कारण ही झुकना पड़ा है। यह जीत इसुदान गढ़वी के साथ सभी किसानों की जीत है। सहायता मिले या न मिले, फसल सूखे या न सूखे, इन सभी बातों के अलावा किसानों पर झूठे केस करके जेल में धकेला गया और किसानों के घर में घुसकर उनकी माताओं, बहनों और बेटियों पर पुलिस ने जो आतंक और अत्याचार किया है, उसे हम कभी भूल नहीं सकते। हमारी असली ताकत डॉक्टर बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए मताधिकार में निहित है। सामान्य साइकिल पर जाकर वोट देने वाले नागरिक और हेलीकॉप्टर में आने वाले व्यक्ति, दोनों के वोट का मूल्य एक समान है। आप सभी से मेरी विनती है कि अपने इस मताधिकार की शक्ति और साहस को पहचानें तथा किसानों पर अत्याचार करने वाले शासकों को उचित जवाब दें।