मुद्दा भटके नहीं इसलिए मैं रैली में शामिल नहीं हो रहा हूं, 54 लाख किसान परिवारों से माफी मांगता हूं: इसुदान गढ़वी
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने फेसबुक लाइव के माध्यम से एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि पूरे गुजरात में भाजपा के दबाव में कंपनियों और ठेकेदारों द्वारा पुलिस का दुरुपयोग करके बिजली लाइनों के खंभे लगाए जा रहे हैं। इस मुद्दे पर हम जेतपुर गांव गए थे और वहां किसानों की मांग थी कि हम ट्रैक्टर रैली में शामिल हों और हमने भी कहा था कि अगर किसान का मुद्दा और किसान का काम होगा तो हम भी शामिल होंगे और आम आदमी पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता भी शामिल होगा। लेकिन जब किसान के नाम पर कुछ लोग और कुछ राजनीतिक पार्टियां किसी के इशारे पर राजनीति करती हैं और बयान देती हैं, तब दुख होता है। इसलिए आज मैं इस रैली में शामिल नहीं हो सकता, इसका मुझे दुख है और मैं माफी चाहता हूं, लेकिन आम आदमी पार्टी से जुड़े किसान इस ट्रैक्टर रैली में निश्चित रूप से शामिल होंगे। किसानों के मुद्दे पर हर पार्टी के हर व्यक्ति को जुड़ना चाहिए, लेकिन पता नहीं राहुल गांधी को क्या पीड़ा हुई या फिर कुछ लोगों की भाजपा नेताओं के साथ सांठगांठ होगी कि वे नहीं चाहते थे कि गोपाल इटालिया और इसुदान गढ़वी इस ट्रैक्टर रैली में शामिल हों। इस लड़ाई को हमारा समर्थन है, लेकिन मुद्दा भटके नहीं इसलिए मैं इस रैली में शामिल नहीं हो रहा हूं और इसके लिए मैं 54 लाख किसान परिवारों से माफी मांगता हूं।
आगे प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कहा कि मैं भरोसा दिलाता हूं कि हम किसानों के मुद्दे को रुकने नहीं देंगे। किसानों के मुद्दों को कल से मजबूती से उठाने की जिम्मेदारी हमारी रहेगी। गोपाल इटालिया ने भी विधानसभा में अपना बिल पेश करके मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी। पुलिस किराए पर मिलती है, यह बात भी गोपाल इटालिया ने ही विधानसभा में सवाल पूछकर जनता के सामने लाई थी। किसानों को निराश होने की जरूरत नहीं है, यही भरोसा देने के लिए मैं यह फेसबुक लाइव कर रहा हूं। हमें चुनावों में साथ और समर्थन मिला हो या न मिला हो, फिर भी हम किसी भी मुद्दे पर मौन नहीं रहे हैं। हमसे किसानों की पीड़ा देखी नहीं जाती, इसलिए हर मुद्दे पर हम आवाज उठाते हैं। जेतपुर मुद्दे पर भी मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैंने हमारे किसान नेता पंकजभाई राणसरिया से कहा था कि अगर किसान कहें कि राजनीतिक नेताओं को बुलाओ तभी हम आ सकते हैं, क्योंकि किसानों का काम होना चाहिए, मुद्दा नहीं भटकना चाहिए। मेरा सवाल है कि भाजपा और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कहां पहुंचे हैं? आज किसानों में कांग्रेस के प्रति बहुत रोष है, किसान कह रहे हैं कि आप मना करने वाले कौन होते हैं?
also read: गोपाल इटालिया: ट्रांसमिशन लाइन मुद्दे पर कांग्रेस के…
आगे प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कहा कि मुझे बार-बार किसानों के फोन आ रहे हैं, जो मुझे इस रैली में शामिल होने के लिए कह रहे हैं, लेकिन मैं उन सभी से कहना चाहता हूं कि यह केवल एक दिन की बात नहीं है। मैं राजनीति में नहीं था तब भी लड़ता था, आज भी लड़ रहा हूं और अगर कभी राजनीति छोड़ भी दूंगा तो भी किसानों के लिए लड़ता रहूंगा। कांग्रेस तो 30 साल से विधानसभा में है, तब कहां थी? तब किसानों के मुद्दे उठाने थे या नहीं? राज्यसभा में आपके सांसद थे, तो क्या उन्होंने कभी भी बिजली के खंभों के मुद्दे पर आवाज उठाई? या कानून बनाने की बात की? इसलिए मैं उन लोगों से इतना ही कहना चाहता हूं कि मिलीभगत करके किसानों के आंदोलन को तोड़ना बंद करें। यह किसानों की रैली है, किसी पार्टी की रैली नहीं। कांग्रेस को चिंता करने की जरूरत नहीं है कि इसुदान गढ़वी या गोपाल इटालिया आकर रैली को हाईजैक कर लेंगे, हमें किसी आंदोलन को हाईजैक करने की जरूरत नहीं है। कड़दा प्रथा को बंद कराने में भी आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मेहनत की है और आम आदमी पार्टी के नेता जेल भी गए हैं।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कहा कि आवाज उठाना और उसे मजबूत बनाना किसी एक पार्टी का काम नहीं है। हम हमेशा जमीनी स्तर पर जाकर लोगों के बीच रहकर काम करते हैं। लोग हमें प्यार देते हैं, लेकिन जब किसानों या किसी भी आंदोलन की बात हो तो उसे केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं है। कुछ बड़े नेता अपने स्वार्थ के लिए ऐसी बातें करते हैं, लेकिन उन्हें गुजरात के किसानों से वास्तव में प्रेम नहीं है। हम सभी किसान के बेटे हैं और किसानों का हित ही सबसे पहले होना चाहिए। अतीत में जो आंदोलन हुए थे, उनमें भी कुछ लोग सत्ता से दूर रहे हैं क्योंकि उनकी नीति और निष्ठा पर सवाल थे। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस और भाजपा के बीच मिलीभगत के कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। स्थानीय स्वराज की चुनावों से लेकर उम्मीदवारों के चयन तक कई मुद्दों पर सवाल उठते हैं। टीवी डिबेट में भी कई बार आम आदमी पार्टी को उचित स्थान नहीं दिया जाता, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। जब अन्य राजनीतिक दलों पर कार्रवाई नहीं होती, तब कुछ नेताओं पर ही सख्त कदम उठाए जाते हैं, जो समानता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इसके बावजूद हमारी पार्टी हमेशा लोगों के मुद्दे उठाती रहेगी और जरूरत पड़ने पर विधानसभा में भी आवाज उठाएगी। न्याय के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा और लोगों के हित के लिए हम लगातार मैदान में रहेंगे।
इसुदान गढ़वी ने आगे कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा किसानों का है और उस मुद्दे को किसी भी तरह भटकाना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक चर्चाओं और सभाओं में मुख्य ध्यान किसानों के प्रश्नों पर ही होना चाहिए। उनके अनुसार गठबंधन तोड़ने का आरोप गलत है, क्योंकि वास्तव में इस प्रकार की परिस्थितियों में निर्णय अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार लिए गए हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे राजनीति के विवादों में न पड़ें और अपने हित तथा मुद्दों को ही प्राथमिकता दें। साथ ही उन्होंने कहा कि जो लोग किसानों के मुद्दे उठाते हैं, उनका विरोध करने की जरूरत नहीं है, चाहे वे अलग राजनीतिक विचारधारा से आते हों। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक परिस्थितियों और गलतफहमियों के बीच भी उनकी पार्टी किसानों के हित के लिए लगातार संघर्ष जारी रखेगी। ईसुदान गढ़वी ने कार्यकर्ताओं से भी कहा कि वे लोगों के बीच जाकर मुद्दों को मजबूती से उठाएं। ईसुदान गढ़वी ने आगे बताया कि मैंने इस संबंध में पहले ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उसमें कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर कलेक्टर स्तर की बैठकों से लेकर उच्चस्तरीय राज्य समिति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जाए। इस समिति में केंद्र सरकार, राज्य सरकार के अधिकारी, कंपनी के प्रतिनिधि, किसानों के प्रतिनिधि और सेवानिवृत्त न्यायाधीश शामिल होने चाहिए, ताकि सभी पक्षों की उपस्थिति में न्यायसंगत निर्णय लिया जा सके। इस प्रस्ताव के अनुसार बिजली दर, जमीन की कीमत और भूमि उपयोग परिवर्तन जैसे मुद्दों पर पारदर्शी तरीके से निर्णय होना चाहिए। सुझाव दिया गया कि किसानों को कंपनी के मुनाफे में भी हिस्सा मिलना चाहिए, ताकि लंबे समय में उनकी आय भी बढ़े। वर्तमान में अधिकांश लाभ कंपनियों, ठेकेदारों और कुछ बिचौलियों तक पहुंचता है, जबकि किसानों को पर्याप्त हिस्सा नहीं मिलता। इसलिए ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है जिसमें मुनाफे का निश्चित प्रतिशत सीधे किसानों को मिले और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तथा नियमित रूप से हर महीने या निर्धारित समयावधि में समीक्षा के अधीन रहे।