भारतीय क्रिकेट को दुनिया में पहचान दिलाने वाले पहले बैटिंग सुपरस्टार Sunil Gavaskar ने 10 जुलाई को अपना 76वां जन्मदिन मनाया। ‘लिटिल मास्टर’ के नाम से मशहूर गावस्कर ने सिर्फ क्लासिकल बल्लेबाजी की मिसाल कायम नहीं की, बल्कि कठिन विदेशी हालात और दिग्गज गेंदबाजों के सामने डटकर खेलने की भारतीय परंपरा की नींव रखी। उनके बाद ही सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, एमएस धोनी, विराट कोहली और अब शुभमन गिल जैसे बल्लेबाज सामने आए।
विदेशी पिचों पर भी दिखाया दम
Sunil Gavaskar ने साबित कर दिया कि विदेशी ज़मीन पर रन बनाना असंभव नहीं है। आज इंग्लैंड में शुभमन गिल शानदार फॉर्म में हैं, लेकिन इसकी शुरुआत दशकों पहले सुनील गावस्कर ने ही की थी। उन्होंने भारतीय बल्लेबाजी को नया आत्मविश्वास और दिशा दी।
गावस्कर का सफर और दिलचस्प किस्से
Sunil Gavaskar का जन्म 10 जुलाई 1949 को मुंबई के एक सामान्य मराठी परिवार में हुआ था। उनके जन्म के समय अस्पताल में हुई गड़बड़ी की वजह से एक बार उन्हें एक मछुआरा अपना बच्चा समझकर ले गया था, लेकिन उनके मामा ने समय रहते पहचान कर उन्हें वापस पाया।
Sunil Gavaskar के पिता मनोहर गावस्कर क्लब क्रिकेटर थे और उनके मामा माधव मांत्रे भारत के लिए टेस्ट खेल चुके थे। दिलचस्प बात ये है कि गावस्कर का पहला प्यार क्रिकेट नहीं बल्कि कुश्ती थी। वे पहलवान बनना चाहते थे और रेसलर मरुति वडार के बड़े फैन थे। लेकिन मामा की भारतीय टीम की जर्सी ने उनका मन बदल दिया और क्रिकेट ही उनका रास्ता बन गया।
शुरुआत से ही दिखा टैलेंट
सेंट जेवियर्स हाई स्कूल से पढ़ाई करने वाले गावस्कर ने स्कूल क्रिकेट में ही 246*, 222 और 85 रन की पारियां खेलकर देश के बेस्ट स्कूलबॉय क्रिकेटर का खिताब जीता। 1966-67 में उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया और 1971 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में टेस्ट करियर की शुरुआत की।
ऐतिहासिक डेब्यू और रिकॉर्ड्स की झड़ी
अपने पहले ही टेस्ट सीरीज में उन्होंने 774 रन बनाए – जो आज भी किसी डेब्यू सीरीज में सबसे ज्यादा रन हैं। इसी सीरीज में भारत ने पहली बार वेस्टइंडीज को टेस्ट सीरीज में हराया।
Sunil Gavaskar भारत के पहले बल्लेबाज बने जिन्होंने टेस्ट में 10,000 रन का आंकड़ा पार किया। उन्होंने 125 टेस्ट खेले और 34 शतक जमाए, जिनमें से 13 सिर्फ वेस्टइंडीज के खिलाफ थे। उनका सर्वोच्च स्कोर 236* था, जो 1983 में वेस्टइंडीज के खिलाफ चेन्नई में आया।
लॉर्ड्स छोड़ बाकी सब किया फतह
जहां एक ओर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज जैसी टीमों के खिलाफ शतक पर शतक जमाए, वहीं लॉर्ड्स मैदान पर कभी टेस्ट शतक नहीं बना सके। फिर भी वह पहले भारतीय बल्लेबाज बने जिन्होंने तीन बार एक टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाया।
कप्तानी और वर्ल्ड कप सफर
Sunil Gavaskar ने भारत की कप्तानी भी की और 47 टेस्ट में कप्तान रहे, लेकिन जीत सिर्फ 9 में मिली। वो 1983 की विश्व विजेता टीम का हिस्सा भी थे, हालांकि वनडे में उनका प्रदर्शन औसत रहा। 1975 के विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 174 गेंदों पर 36* रन की बेहद धीमी पारी के लिए भी वे याद किए जाते हैं।
Sunil Gavaskar का क्रिकेट से आगे का जीवन
टेस्ट और वनडे से 1987 में संन्यास लेने के बाद Sunil Gavaskar ने कमेंट्री की दुनिया में भी जबरदस्त पहचान बनाई। 2009 में वे ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल किए गए और उन्हें पद्म भूषण, अर्जुन अवॉर्ड और बीसीसीआई का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिल चुका है।
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी और अन्य पहचान
उनके सम्मान में भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज का नाम ‘बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी’ रखा गया। उन्होंने चार किताबें भी लिखीं और एक मराठी फिल्म में अभिनय किया।
परिवार और निजी जीवन
Sunil Gavaskar ने 1974 में पम्मी (मार्शनील) से शादी की और उनके बेटे रोहन गावस्कर ने भी भारत के लिए वनडे खेले। उनकी बहन कविता की शादी भारत के पूर्व बल्लेबाज गुंडप्पा विश्वनाथ से हुई।
खेल भावना और साहस की मिसाल
Sunil Gavaskar अधिकतर समय बिना हेलमेट खेले और दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों का सामना डटकर किया। वे सिर्फ रन मशीन नहीं थे, बल्कि भारतीय क्रिकेट के आत्मविश्वास और जुझारूपन की पहली पहचान भी थे।
उनका क्रिकेट सफर एक प्रेरणा है – तकनीक, संयम और साहस का बेहतरीन उदाहरण। 76 साल की उम्र में भी उनका कद भारतीय क्रिकेट में उतना ही ऊंचा है जितना उनके खेलने के दिनों में था।