भारतीय मुक्केबाजों ने विश्व मुक्केबाजी कप में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 20 पदक जीते। महिला मुक्केबाजों ने 9 स्वर्ण सहित 7 गोल्ड मेडल अपने नाम किए, जबकि पुरुषों ने भी शानदार जीत हासिल की।
भारतीय मुक्केबाजों ने विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी 20 वजन वर्गों में पदक जीते। भारत ने कुल 9 स्वर्ण, 6 रजत और 5 कांस्य पदक अपने नाम किए। महिला मुक्केबाजों ने विशेष रूप से दमदार प्रदर्शन किया और 7 स्वर्ण पदक अपने करियर में जोड़े।
महिला मुक्केबाजों का दमदार प्रदर्शन
स्टार मुक्केबाज निकहत जरीन की अगुआई में भारतीय महिला मुक्केबाजों ने शानदार जीत दर्ज की। महिला वर्ग में जैस्मीन लंबोरिया (57 किग्रा), मीनाक्षी हुड्डा (48 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), परवीन हुड्डा (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा) और नुपुर श्योराण (80+ किग्रा) ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
रजत पदक जीतने वालों में जादुमणि सिंह (50 किग्रा), अभिनाश जामवाल (65 किग्रा), पवन बर्तवाल (55 किग्रा), अंकुश फंगल (80 किग्रा), नरेंद्र बेरवाल (90 किग्रा) और पूजा रानी (80 किग्रा) शामिल हैं। वहीं, कांस्य पदक विजेता रहे नीरज फोगाट (65 किग्रा), स्वीटी (75 किग्रा), सुमित कुंडू (75 किग्रा), जुगनू (85 किग्रा) और नवीन (90 किग्रा)।
पुरुष वर्ग में भी भारत ने कमाल किया
पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच ने किर्गिस्तान के मुनारबेक उलु सेइतबेक को 5-0 से हराया, जबकि हितेश गुलिया ने कजाखस्तान के नूरबेक मुर्सल को 3-2 से मात दी।
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महत्वपूर्ण मुकाबले और जीत
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जैस्मीन लंबोरिया ने पेरिस ओलंपिक्स की पदक विजेता वू शिह यी को रोमांचक फाइनल में 4-1 से हराया।
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प्रीति पवार ने इटली की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता सिरीन चर्राबी को मात दी।
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दो बार की विश्व चैंपियन निकहत जरीन (50 किग्रा) ने चीनी ताइपे की गुओ यी शुआन को 5-0 से हराया।
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परवीन हुड्डा ने जापान की अयाका तागुची पर 3-2 से जीत हासिल की।
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मीनाक्षी हुड्डा ने मौजूदा एशियाई चैंपियन फरजोना फोजिलोवा को 5-0 से हराया।
भारतीय मुक्केबाजी महासंघ में तनाव
इस टूर्नामेंट के दौरान भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) की विशेष आम बैठक (SGM) में नए टकराव के संकेत मिले। कुछ राज्य इकाइयों के सदस्यों ने महासंघ के कामकाज पर असहमति जताते हुए अध्यक्ष अजय सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का दावा किया।
अजय सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कई सदस्य जिन्होंने दस्तखत किए, उन्होंने उनके भरोसे का भी समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दावा कि प्रस्ताव तीन-चौथाई सदस्यों द्वारा लाया गया, गलत है।