हरियाणा सरकार ने लिंग अनुपात सुधारने के उद्देश्य से आईवीएफ से जुड़ा एक नया नियम लागू किया है। इस पॉलिसी के तहत अगर किसी दंपत्ति की पहली संतान बेटी है और वे दूसरा बच्चा इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक से करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी। बिना सरकारी इजाज़त, ऐसे कपल्स IVF प्रक्रिया नहीं करवा सकेंगे।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा लागू किए गए इस नियम के तहत, इच्छुक दंपत्ति को जिला उपयुक्त प्राधिकरण (District Appropriate Authority) को आवेदन देना होगा, जिसमें उन्हें पहले बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, पूर्व गर्भधारण या गर्भपात से जुड़ी मेडिकल जानकारी और IVF कराने का कारण स्पष्ट करना होगा। अनुमति के बिना प्रक्रिया कराने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस नीति का मकसद IVF के ज़रिए भ्रूण के लिंग की पहचान कर चयन (Gender Selection) पर रोक लगाना है, जिससे लड़कियों की संख्या में कमी आ रही है। राज्य में 2024 में जन्म के समय लिंगानुपात गिरकर 910 लड़कियां प्रति 1000 लड़कों तक पहुंच गया है, जो चिंताजनक स्थिति है।
इसके साथ ही IVF क्लीनिकों के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं:
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सभी उपचारों और भ्रूण चयन से जुड़ी रिपोर्ट्स स्वास्थ्य विभाग को सौंपनी होंगी।
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किसी भी स्थिति में केवल पुरुष भ्रूण प्रत्यारोपित (implant) नहीं किए जा सकेंगे।
सरकार को उम्मीद है कि इस नई नीति से भ्रूण लिंग चयन जैसी अवैध प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी और राज्य में लिंग संतुलन बेहतर होगा।