हरियाणा सरकार ने PG बॉन्ड पॉलिसी में बदलाव किया है। अब क्लिनिकल स्पेशलिस्ट डॉक्टर मूल विभाग में काम करेंगे, जबकि अन्य डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों में सेवा देनी होगी।
हरियाणा सरकार ने सरकारी डॉक्टरों के लिए PG बॉन्ड पॉलिसी में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इस नए निर्णय का उद्देश्य राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाना और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना है।
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क्लिनिकल स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को बड़ी राहत
नए नियमों के अनुसार, जो डॉक्टर सरकारी सेवा में रहते हुए क्लिनिकल स्पेशलिटी में पोस्टग्रेजुएट डिग्री प्राप्त करेंगे, वे अब अपने मूल विभाग में ही कार्यरत रहेंगे। इससे राज्य में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार की उम्मीद है।
हरियाणा सरकार ने सरकारी डॉक्टरों के लिए पीजी बॉन्ड पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है।
एसीएस स्वास्थ्य डॉ. @sumitamisra ने बताया कि जो डॉक्टर सरकारी सर्विस में रहते हुए क्लीनिकल स्पेशलिटी में पोस्टग्रेजुएट डिग्री कर लेते हैं वे अपने मूल विभाग में काम करते रहेंगे, जिससे पूरे हरियाणा…
— DPR Haryana (@DiprHaryana) June 3, 2026
नॉन-क्लिनिकल और पैरा-क्लिनिकल डॉक्टरों के लिए नई शर्त
नॉन-क्लिनिकल और पैरा-क्लिनिकल स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के लिए अब तीन साल की अनिवार्य सेवा की व्यवस्था लागू होगी। ऐसे डॉक्टर, जिन्होंने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण के तहत पीजी कोर्स पूरा किया है, उन्हें अब मेडिकल एजुकेशन एवं रिसर्च विभाग के अंतर्गत मेडिकल शिक्षण संस्थानों में तीन साल तक सेवा देनी होगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा फायदा
सरकार के इस फैसले से हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल एजुकेशन सिस्टम को मजबूत करने की उम्मीद है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।