हरियाणा सरकार का एक साल पूरा होने वाला है, इस दौरान सरकार ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं और फैसलों को लागू किया, लेकिन फिर भी कई चुनौतियाँ बरकरार हैं। सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए, जिनमें लाडो लक्ष्मी योजना और अनुसूचित जाति में नौकरियों के लिए कोटे के अंदर कोटा शामिल हैं। इसके साथ ही कई अन्य योजनाओं ने प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन कुछ मुद्दों पर विपक्ष और जनता ने सरकार को आलोचना का सामना भी करना पड़ा।
मुख्य उपलब्धियाँ और योजनाएँ:
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लाडो लक्ष्मी योजना: हरियाणा सरकार ने अपनी पहली सालगिरह में महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये देने की योजना लागू की। यह योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई है।
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कोटे में कोटा प्रणाली: अनुसूचित जाति के लिए नौकरियों में कोटे के अंदर कोटे का प्रावधान लागू किया गया है, जिससे वंचित समुदायों को विशेष लाभ मिल सके।
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किडनी रोगियों के लिए मुफ्त डायलिसिस: हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में किडनी रोगियों के लिए मुफ्त डायलिसिस की सुविधा शुरू की गई है, जो राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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हिसार एयरपोर्ट से नई उड़ानें: हिसार एयरपोर्ट से अयोध्या, चंडीगढ़, दिल्ली और जयपुर के लिए उड़ानें शुरू की गई हैं, जिससे राज्य की कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है। जल्द ही अहमदाबाद और जम्मू के लिए भी उड़ानें शुरू होने वाली हैं।
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ग्रामीण आवास योजना: मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 4533 लाभार्थियों को भूमि देने का फैसला लिया गया है, जो प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाएगा।
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चुनौतियाँ और असहज स्थितियाँ:
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वित्तीय संकट: हरियाणा सरकार पर भारी कर्ज का बोझ है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार अपने कुल खर्च का 16.67% ब्याज भुगतान में खर्च कर रही है, जो वित्तीय स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
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बेलगाम अपराध: राज्य में अपराध की दर बढ़ रही है। खासकर, रंगदारी और गैंगवार की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। वर्तमान में हरियाणा में 80 सक्रिय गैंग हैं, जो राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।
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कृषि संकट: किसानों को डीएपी और यूरिया जैसे खाद्यान्न संकट का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। हर साल समय पर खाद की उपलब्धता न होने के कारण किसानों को भारी परेशानी होती है।
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जलभराव और बुनियादी ढांचे की समस्या: विशेष रूप से गुरुग्राम में जलभराव की समस्या, जो भारी बारिश के दौरान और अधिक गंभीर हो जाती है, प्रदेश की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है।
विपक्ष की आलोचनाएँ:
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार को विफल करार देते हुए कहा कि इस एक साल में सरकार ने किसानों और आम लोगों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था के बिगड़ने और बेरोजगारी की बढ़ती समस्या को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया।
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने सरकार की कई उपलब्धियों की सराहना की। उनका कहना था कि सरकार ने अपने संकल्प पत्र में किए गए वादों में से कई को पूरा किया है और राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए आईएमटी (इंस्टिट्यूशनल मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी) स्थापित करने की योजना पर काम जारी है।
हरियाणा सरकार ने अपने पहले साल में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनसे राज्य के विकास को बढ़ावा मिला है, लेकिन साथ ही कई चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। विपक्ष के आरोपों और जनता की उम्मीदों के बीच सरकार के लिए अगला साल अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जहां उसे न केवल अपनी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करना होगा, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था, कृषि संकट और बेरोजगारी जैसी समस्याओं का समाधान भी करना होगा।