ASI आत्महत्या मामला: मुख्यमंत्री नायब सैनी ने संभाली कमान, 34 घंटे में सियासी तनाव पर विराम

ASI आत्महत्या मामला: मुख्यमंत्री नायब सैनी ने संभाली कमान, 34 घंटे में सियासी तनाव पर विराम

ASI आत्महत्या मामला: हरियाणा में ASI संदीप लाठर की आत्महत्या के बाद मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 34 घंटे में सियासी तनाव को सुलझाया। मामले में त्वरित कार्रवाई और पीड़ित परिवार की मांगों को स्वीकार कर स्थिति को नियंत्रित किया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

ASI आत्महत्या मामला: ASI संदीप लाठर की आत्महत्या के बाद उत्पन्न तनाव को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने खुद कमान संभाली और 34 घंटे में सियासी हलचल पर विराम लगा दिया। इससे पहले, एडीजीपी पूरण कुमार की आत्महत्या के बाद अधिकारियों की नाकामी के कारण हालात और बिगड़े थे, और सरकारी तंत्र की किरकिरी हो चुकी थी।

एडीजीपी पूरण कुमार की 7 अक्टूबर को हुई आत्महत्या के बाद उनकी आईएएस पत्नी अमनीत कुमार ने पोस्टमार्टम रोकते हुए डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारणिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस दौरान चंडीगढ़ में आठ दिन तक सियासी हलचल मची रही। कांग्रेस के राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, चिराग पासवान सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री वहां पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और अन्य कांग्रेसी नेताओं ने सैनी सरकार पर दबाव डाला। इस प्रकरण ने न केवल भाजपा सरकार की छवि को प्रभावित किया, बल्कि सोनीपत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम भी रद्द करवा दिया।

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मुख्यमंत्री सैनी की त्वरित कार्यवाही ने स्थिति को संभाला

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने यह महसूस किया कि रोहतक, जहां भूपेंद्र हुड्डा का राजनीतिक गढ़ है और जाट समुदाय की संख्या अधिक है, यहां स्थिति बिगड़ने पर राजनीतिक संकट बढ़ सकता है। इसलिए, उन्होंने इस मामले को अपने हाथ में लिया और किसी दूसरे अफसर पर भरोसा नहीं किया।

बुधवार सुबह, बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह में शामिल होने के बाद, सीएम नायब सैनी सीधे लाठर के परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने संदीप लाठर की पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य से बात की और उनकी सभी मांगों को स्वीकार करते हुए चार आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही, लाठर के परिवार की अन्य मांगें, जैसे पत्नी को नौकरी, बच्चों की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद और सम्मानजनक अंतिम संस्कार, भी पूरी की गईं।

जाट समुदाय और भाजपा समर्थकों के बीच संतुलन बनाए रखा

सीएम सैनी ने अपनी नेतृत्व क्षमता से भाजपा समर्थकों और जाट समुदाय के बीच संतुलन बनाए रखा। रोहतक, जो कांग्रेस का गढ़ है, में सियासत और ज्यादा न बिगड़े, इसके लिए उन्होंने तुरंत कदम उठाए। इसके बाद, सैनी ने भाजपा समर्थकों को संदेश दिया कि सरकार उनके साथ खड़ी है और पीड़ित परिवार को भी सियासत से दूर रखने की कोशिश की।

बुधवार रात 10 बजे, परिवार ने पोस्टमार्टम के लिए शव को डेड हाउस भेजने की अनुमति दी, और यह मामला महज 34 घंटे में सुलझा लिया गया।

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