हरिद्वार जमीन घोटाला: हरिद्वार जमीन घोटाले में बड़ी कार्रवाई, तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू। सीएम धामी ने कहा- भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है सरकार।
हरिद्वार जमीन घोटाला मामले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड सरकार जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है।
हरिद्वार जमीन घोटाले में कौन-कौन है आरोपी?
हरिद्वार नगर निगम द्वारा ग्राम सराय में 2.3070 हेक्टेयर अनुपयुक्त भूमि को ₹54 करोड़ में खरीदा गया था, जो कूड़े के ढेर के पास स्थित थी। इस डील में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद शासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों को निलंबित किया।
आरोपियों में शामिल प्रमुख अधिकारी:
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कर्मेन्द्र सिंह – तत्कालीन जिलाधिकारी, हरिद्वार
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वरुण चौधरी – तत्कालीन नगर आयुक्त
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अजयवीर सिंह – तत्कालीन एसडीएम (पहले से निलंबित)
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विभागीय जांच प्रक्रिया शुरू
गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत अजयवीर सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पहले ही उन्हें आरोप पत्र दिया जा चुका था, जिस पर उन्होंने 16 सितंबर को अपना जवाब प्रस्तुत किया था। अब जांच के लिए अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव (IAS) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें एक महीने के भीतर रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, कर्मेन्द्र सिंह और वरुण चौधरी के खिलाफ विभागीय जांच की जिम्मेदारी सचिव सचिन कुर्वे (IAS) को सौंपी गई है।
अब तक कितने अधिकारी हुए निलंबित?
सरकार इस मामले में अब तक 12 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर चुकी है, जिनमें दो IAS और एक PCS अधिकारी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री का बयान: “कठोर कार्रवाई होगी”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घोटाले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा: “राज्य सरकार शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। चाहे वह किसी भी स्तर का अधिकारी हो, यदि दोषी पाया गया तो कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”