Thursday, September 10, 2026

गुजरात में UCC की फाइनल तैयारी: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंपा समान नागरिक संहिता का मसौदा

by Neha
गुजरात में UCC की फाइनल तैयारी: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंपा समान नागरिक संहिता का मसौदा

गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पांच सदस्यीय समिति ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को अंतिम मसौदा सौंपा।

 गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय समिति ने मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी। यह रिपोर्ट विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे अहम मुद्दों पर सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रस्तुत करती है। इसका मकसद अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक ऐसा सिस्टम बनाना है, जो सभी पर बराबरी से लागू हो।

महिलाओं के अधिकारों पर विशेष ध्यान

समिति ने मसौदे में महिलाओं के अधिकार और उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। समिति का कहना है कि कानून ऐसा होना चाहिए जिससे महिलाओं को समान अधिकार मिलें और किसी भी तरह का भेदभाव न हो।

सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता का ध्यान

समिति ने गुजरात की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का ख्याल रखते हुए कानून तैयार किया है। यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि प्रस्तावित कानून राज्य के विभिन्न समुदायों और परंपराओं के साथ संतुलन बनाए रखे।

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तीन खंडों में तैयार की गई रिपोर्ट

सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने गांधीनगर में मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट को तीन खंडों में तैयार किया गया है, जिसमें विस्तृत सुझाव और कानूनी ढांचा शामिल है।

समिति में अनुभवी विशेषज्ञ शामिल थे, जिनमें सेवानिवृत्त IAS अधिकारी सीएल मीणा, वरिष्ठ अधिवक्ता आर.सी. कोडेकर, वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. दक्षेश ठाकर, और सामाजिक कार्यकर्ता गीता श्रॉफ शामिल रहे।

इन सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव के आधार पर सुझाव दिए, जिससे मसौदा व्यापक और व्यावहारिक बन सका। समिति ने कानून, प्रशासन, शिक्षा और सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया।

आगे की प्रक्रिया

अब सरकार इस रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्यवाही तय करेगी। यदि यह कानून लागू होता है, तो गुजरात देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है, जहां समान नागरिक संहिता के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं।

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