गुजरात सरकार ने प्रचार और मार्केटिंग पर 108 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि राज्य में कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याएं गंभीर हैं। विपक्ष ने जनता के धन के दुरुपयोग पर सवाल उठाए।
गुजरात सरकार ने हाल ही में प्रचार और मार्केटिंग गतिविधियों पर 108 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिससे विपक्ष ने आलोचना शुरू कर दी है। राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, बेरोजगारी की समस्या गंभीर है, और आम जनता महंगाई और जीवनयापन की कठिनाइयों का सामना कर रही है।
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राज्य सरकार पर आरोप है कि जनता की भलाई के बजाय केवल लोकप्रियता हासिल करने के लिए भारी खर्च किया गया। विज्ञापन और प्रचार अभियानों में लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और प्रिंट मीडिया दोनों शामिल हैं। विभिन्न विभागों और मंत्रियों के जनसंपर्क अधिकारियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रचार बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
विपक्ष ने कहा है कि यदि सरकार सच में जनहितैषी कार्य कर रही है, तो इसे साबित करने के लिए बड़े पैमाने पर विज्ञापन की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। जनता के कर के पैसे का प्रचार पर खर्च होना उचित नहीं माना जा रहा।