अचानक खड़े होने पर चक्कर आना: जानें इसके कारण और बचाव

अचानक खड़े होने पर चक्कर आना: जानें इसके कारण और बचाव

अचानक खड़े होने पर चक्कर आना, धुंधला दिखना या बेहोशी का अनुभव ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन का संकेत हो सकता है। जानें कारण और बचाव।

कभी-कभी अचानक खड़े होते ही आंखों के सामने अंधेरा छा जाना या चक्कर आना सामान्य लगता है, लेकिन यह स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है। मेडिकल एक्सपर्ट इसे ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन या पोश्चर हाइपोटेंशन कहते हैं। यह स्थिति तब होती है जब बैठी या लेटी स्थिति से खड़े होने पर शरीर ब्लड प्रेशर को तुरंत एडजस्ट नहीं कर पाता और दिमाग तक पर्याप्त खून नहीं पहुँच पाता।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक कुमार के अनुसार, खड़े होने पर ग्रेविटी की वजह से खून पैरों की ओर चला जाता है। आमतौर पर ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम नसों को सिकोड़कर और दिल की धड़कन बढ़ाकर ब्लड प्रेशर को संतुलित कर लेती है। लेकिन जब यह प्रतिक्रिया धीमी हो जाए, तो चक्कर, धुंधला दिखना या हल्की बेहोशी महसूस हो सकती है।

डायटीशियन और वेट मैनेजमेंट एक्सपर्ट भी कहते हैं कि खड़े होते समय पैरों में खून जमा होने से दिमाग तक ऑक्सीजन की कमी होती है। इस समस्या से बचाव के लिए धीरे-धीरे खड़ा होना, पर्याप्त पानी पीना और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

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इसके मुख्य कारण

  • डिहाइड्रेशन और पानी की कमी

  • खून की कमी (एनिमिया)

  • लंबे समय तक बिस्तर पर रहना

  • कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट

  • उम्र बढ़ने के साथ शरीर की प्रतिक्रिया क्षमता में कमी

रिसर्च में यह भी पाया गया है कि खड़े होते ही पहले एक मिनट में ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना डिमेंशिया के खतरे से जुड़ा हो सकता है। यदि खड़े होने के 30 सेकंड के भीतर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 20 mmHg या उससे अधिक गिरा, तो भविष्य में डिमेंशिया का जोखिम बढ़ जाता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

एक्सपर्ट के अनुसार यदि बार-बार खड़े होने पर चक्कर आए, तो डॉक्टर को तुरंत बताना चाहिए और खड़े होकर ब्लड प्रेशर की जांच करानी चाहिए। खासकर बुजुर्गों में यह गिरने, हड्डी टूटने और गंभीर चोट का कारण बन सकता है।

बचाव के उपाय

  • धीरे-धीरे खड़ा होना

  • पर्याप्त पानी पीना

  • पैरों की एक्सरसाइज करना

  • घर में फिसलन से बचाव के इंतज़ाम करना

  • डॉक्टर से दवाओं की समीक्षा कराना

समय पर सावधानी और जीवनशैली में बदलाव के साथ इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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