गर्मियों में जरूरत से ज्यादा Water पीना वाटर इंटॉक्सिकेशन की वजह बन सकता है, जानें कितनी मात्रा में Water पीना सही होता है।

गर्मियों में जरूरत से ज्यादा Water पीना वाटर इंटॉक्सिकेशन की वजह बन सकता है, जानें कितनी मात्रा में Water पीना सही होता है।

गर्मियों में शरीर को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक Water की आवश्यकता होती है, लेकिन इसकी मात्रा व्यक्ति की सेहत और उसकी दिनचर्या पर निर्भर करती है। अक्सर गर्मी में लंबे समय तक धूप में रहने के बाद तेज प्यास लगती है, ऐसे में कई लोग आवश्यकता से अधिक Water पी लेते हैं।

गर्मी के मौसम में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके चलते पसीना ज्यादा आता है, जिससे प्यास भी अधिक लगती है। लोग डिहाइड्रेशन के डर से अकसर जरूरत से ज्यादा पानी पी लेते हैं। हालांकि जैसे कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है, वैसे ही अत्यधिक Water पीना भी शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इससे किडनी और लिवर पर असर पड़ सकता है, यहां तक कि शरीर में सूजन भी आ सकती है।

गर्मी में शरीर का तापमान संतुलित रखने के लिए अधिक पसीना निकलता है, जिससे पानी की आवश्यकता बढ़ जाती है। ऐसे में लोग अक्सर केवल सादा Water पीते हैं और कई बार तेज प्यास लगने पर एक साथ बहुत अधिक पानी का सेवन कर लेते हैं, जिससे पाचन से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। यदि बार-बार जरूरत से अधिक Water पिया जाए तो यह वाटर इंटॉक्सिकेशन का कारण बन सकता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब शरीर में पानी की मात्रा जरूरत से बहुत ज्यादा हो जाती है, जिससे सोडियम का स्तर गिरने लगता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

Water इंटॉक्सिकेशन के लक्षण क्या होते हैं
गर्मियों में तेज प्यास लगने पर व्यक्ति को धीरे-धीरे और सीमित मात्रा में पानी पीना चाहिए। ऐसे समय में साधारण पानी की बजाय ओआरएस या शिकंजी जैसे इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय लेना अधिक फायदेमंद होता है। अक्सर सादा पानी तात्कालिक रूप से प्यास नहीं बुझा पाता, जिससे लोग आवश्यकता से ज्यादा पानी पी लेते हैं और इससे वाटर इंटॉक्सिकेशन की स्थिति बन जाती है। इस समस्या के लक्षणों में उल्टी, मिचली, सिर दर्द, भ्रम की स्थिति, मांसपेशियों में कमजोरी और गंभीर मामलों में दौरे पड़ना या कोमा में चले जाना शामिल है।

गर्मियों में कितना पानी पीना चाहिए – 
गर्मियों में पसीना अधिक आने के कारण शरीर को अधिक पानी की जरूरत होती है। इसलिए पूरे दिन में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में आधा से एक गिलास पानी पीते रहना चाहिए। कोशिश करें कि बार-बार केवल सादा पानी ही न पिएं, बल्कि नींबू पानी, शिकंजी या अन्य घरेलू हेल्दी ड्रिंक्स का सेवन भी करें। पानी की मात्रा व्यक्ति की उम्र, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य और मौसम के अनुसार बदलती है। आमतौर पर एक वयस्क को दिनभर में 2 से 3 लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है। गर्म मौसम या अधिक मेहनत वाले कामों के दौरान यह मात्रा और बढ़ सकती है। अगर शरीर में किसी प्रकार की अस्वस्थता महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

सावधानियां – पैराफ्रेज:

  • केवल तभी पानी पीएं जब प्यास लगे।
  • बिना प्यास के जबरदस्ती पानी पीने से बचें।
  • एक साथ बहुत अधिक मात्रा में पानी न पिएं।
  • पूरे दिन में थोड़ा-थोड़ा करके पानी का सेवन करें।

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