Thursday, September 10, 2026

हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का विपक्ष पर कड़ा संदेश: लोकतांत्रिक संवाद के लिए सरकार हमेशा तैयार

by Neha
हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का विपक्ष पर कड़ा संदेश: लोकतांत्रिक संवाद के लिए सरकार हमेशा तैयार

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष के निराधार आरोपों का खंडन किया और लोकतांत्रिक संवाद व रचनात्मक बहस के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार हमेशा रचनात्मक और तथ्यात्मक लोकतांत्रिक बहस के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष गलत सूचना और राजनीतिक प्रचार के जरिए जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।

विपक्ष के आरोपों का खंडन

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्षी नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा द्वारा पार्टी कार्यकर्ताओं की कथित “नजरबंदी” के आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने किसी भी व्यक्ति को न हिरासत में लिया और न ही प्रतिबंधित किया है। सदन में प्रस्तुत तस्वीरों से भी इन आरोपों की पुष्टि नहीं होती।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विपक्ष ठोस मुद्दों के बजाय सनसनीखेज दावों पर निर्भर है। उन्होंने पूर्व में ईवीएम छेड़छाड़ और कथित वोट चोरी के आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि उनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। मुख्यमंत्री ने हालिया “नजरबंदी” के दावे को भी जनता में भ्रम फैलाने का प्रयास बताया।

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मीडिया सत्यापन और तथ्य

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन को बताया कि एक ही परिवार से 600 वोट दर्ज होने के आरोप जैसे बड़े दावे मीडिया सत्यापन में निराधार पाए गए। उन्होंने कहा कि बिना सबूत के बार-बार लगाए जाने वाले आरोप सरकार की विकास संबंधी उपलब्धियों पर ध्यान नहीं देने का संकेत हैं।

लोकतांत्रिक अधिकार और रचनात्मक संवाद

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष को याद दिलाया कि सरकार से सवाल करने का पूरा अधिकार है, लेकिन आलोचना तथ्यों पर आधारित और उचित मंचों के माध्यम से उठाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सड़क अवरोध का मुद्दा उच्च न्यायालय ने देखा। चंडीगढ़ प्रशासन ने सेक्टर 25 में प्रदर्शन के लिए विशेष स्थान निर्धारित किया था, और विपक्ष को वहां शांतिपूर्ण विरोध करने की अनुमति थी।

जिम्मेदार आचरण और सार्वजनिक बहस

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हर समय रचनात्मक संवाद के लिए तैयार है, लेकिन सार्वजनिक और विधायी चर्चा में जिम्मेदार आचरण और मर्यादा का पालन अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार मौलिक है, लेकिन इसका प्रयोग सत्य और संयम के साथ होना चाहिए।

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