दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को काबू में लाने के लिए CM Rekha Gupta की सरकार ने एक विस्तृत मास्टर प्लान पेश किया है। इस योजना में क्लाउड सीडिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, कचरे से ऊर्जा बनाने वाले संयंत्र, स्मॉग गन और जल छिड़काव उपकरणों का इस्तेमाल, साथ ही AI आधारित चालान व्यवस्था जैसे उपाय शामिल हैं। इसका उद्देश्य एक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ दिल्ली बनाना है, जिसमें 2027 तक कूड़े के पहाड़ों को पूरी तरह हटाना भी अहम लक्ष्य है।
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए CM Rekha Gupta की सरकार ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। योजना की जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली को सालभर प्रदूषण की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने स्वच्छ, हरित और स्वस्थ राजधानी के लक्ष्य के तहत कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदूषण कम करने के प्रयासों के तहत IIT कानपुर के साथ क्लाउड सीडिंग के लिए साझेदारी की गई है, जिससे दिल्ली में पहली बार कृत्रिम वर्षा कराई जाएगी। इसके साथ ही, नवाचारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से युवाओं और स्टार्टअप्स को प्रभावी समाधानों के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर CM Rekha Gupta सरकार ने एक सख्त और बहुस्तरीय योजना लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए 1000 वाटर स्प्रिंकलर, 140 एंटी स्मॉग गन, 70 मैकेनिकल रोड क्लीनिंग मशीन और 20 डंपिंग वाहनों की तैनाती की जाएगी। इसके अतिरिक्त, 70 इलेक्ट्रिक लिटर पिकर और 30 वाटर टैंकर भी निरंतर काम करते रहेंगे। निर्माण स्थलों पर निगरानी बढ़ेगी और 3000 वर्ग मीटर से बड़े प्रोजेक्ट्स में स्मॉग गन अनिवार्य रूप से लगाई जाएंगी। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए AI आधारित चालान प्रणाली लागू की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वाहन प्रदूषण कम करने के लिए सरकार की ईवी नीति के तहत 2300 ई-ऑटो मेट्रो स्टेशनों पर लगाए जाएंगे। 18,000 से अधिक ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन और 10,000 इलेक्ट्रिक बसें शुरू की जाएंगी। इसके अलावा, 1 नवंबर 2025 से सभी वाणिज्यिक वाहनों को BS6, CNG या EV में अपग्रेड करना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
ठोस कचरा प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) पर भी सरकार का खास फोकस रहेगा। फिलहाल दिल्ली में रोजाना 11 हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसमें से सिर्फ 7 हजार टन का ही निस्तारण हो पाता है। इस समस्या के समाधान के लिए चार वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स पर कार्य प्रगति पर है, और सरकार ने 2027 तक कचरे के पहाड़ पूरी तरह हटाने का लक्ष्य रखा है।
सर्दियों में बायोमास जलाने की समस्या से निपटने के लिए सभी हाउसिंग सोसायटियों में इलेक्ट्रिक हीटर का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाएगा। साथ ही औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निगरानी केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी और शहरभर में स्मॉग गन और वाटर स्प्रिंकलर लगाए जाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन में बदलने के लिए सरकार ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान शुरू करेगी, जिसके अंतर्गत इस वर्ष 70 लाख पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही, ‘पर्यावरण रक्षक ब्रिगेड’ का गठन भी किया जाएगा।
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह डबल इंजन सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू किया जाएगा।