Friday, July 24, 2026

चौमुखी दीपक: क्या आप भी घर में जलाते हैं 4 लौ वाला दीपक? भूलकर भी न करें दिशा की ये गलती

by Neha
चौमुखी दीपक: क्या आप भी घर में जलाते हैं 4 लौ वाला दीपक? भूलकर भी न करें दिशा की ये गलती

चौमुखी दीपक का धार्मिक और वास्तु महत्व जानें। जानिए इसे जलाने की सही दिशा, तेल, लाभ और गलत दिशा में जलाने से होने वाली भूलें। यह दीपक नकारात्मक ऊर्जा और भय दूर करने में सहायक माना जाता है।

हिंदू धर्म में दीपक जलाना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अंधकार से प्रकाश, अज्ञान से ज्ञान और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत दीपक जलाकर ही की जाती है। सामान्यतः एक बाती वाला दीपक प्रयोग किया जाता है, लेकिन चौमुखी दीपक (चार मुख वाला दीपक) का विशेष आध्यात्मिक और वास्तु महत्व होता है।

चौमुखी दीपक का धार्मिक महत्व

मान्यता के अनुसार, चौमुखी दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है। इसकी चारों लौ चार दिशाओं में प्रकाश फैलाती हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि जीवन के हर क्षेत्र में प्रकाश और समृद्धि बनी रहे।

धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि चौमुखी दीपक जलाने से भगवान भैरव की कृपा प्राप्त होती है। भगवान भैरव को संकटों और भय का नाश करने वाला देवता माना जाता है। ऐसे में यह दीपक भय, बाधा और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक माना जाता है।

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सही तेल और दीपक जलाने की विधि

वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चौमुखी दीपक के लिए सरसों का तेल सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। सरसों के तेल से दीपक जलाने पर वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और घर में शांति का माहौल बनता है।

कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे अमावस्या के दिन, तिल के तेल से दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। इसे पितृ दोष निवारण और पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए उपयोगी माना जाता है।

चौमुखी दीपक जलाने की सही दिशा

सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी दिशा मानी जाती है। चौमुखी दीपक को हमेशा दक्षिण दिशा में जलाना शुभ माना गया है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा को विशेष ऊर्जा क्षेत्र माना जाता है। इस दिशा में दीपक जलाने से घर में मौजूद वास्तु दोष कम होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। गलत दिशा में दीपक जलाने से अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं होता, इसलिए दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

पितृ दोष और चौमुखी दीपक का संबंध

मान्यता है कि अमावस्या के दिन तिल के तेल से चौमुखी दीपक जलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं। इससे पितृ दोष से राहत मिलने और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ने की संभावना मानी जाती है। यह उपाय उन लोगों के लिए विशेष रूप से बताया जाता है जिनके जीवन में बार-बार रुकावटें आती हैं या प्रगति धीमी होती है।

चौमुखी दीपक के लाभ

  • चौमुखी दीपक जलाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और सकारात्मकता बढ़ती है।
  • यह मानसिक शांति और आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायक माना जाता है।
  • इसके प्रभाव से व्यक्ति भयमुक्त होकर अपने कार्यों में बेहतर ध्यान लगा सकता है।
  • वास्तु दोष कम होने से घर में संतुलन और शांति का वातावरण बनता है।

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