Monday, August 24, 2026

चातुर्मास 2026: 25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, चार महीने तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य, जानें नियम और महत्व

by Neha
चातुर्मास 2026: 25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, चार महीने तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य, जानें नियम और महत्व

चातुर्मास 2026 की शुरुआत 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी पर होगी और 21 नवंबर को समाप्त होगा। जानें चार महीने तक शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते।

चातुर्मास 2026: अधिकमास समाप्त होने के बाद अब हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण माने जाने वाले चातुर्मास 2026 की शुरुआत होने जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी से होगा और इसका समापन 21 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के दिन होगा।

चातुर्मास की अवधि लगभग चार महीने की होती है। इस दौरान भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने की मान्यता के कारण विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत और अन्य शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है।

चातुर्मास में क्यों नहीं होते शुभ कार्य?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। शुभ और मांगलिक कार्यों में भगवान विष्णु की उपस्थिति को आवश्यक माना जाता है, इसलिए इस समय नए कार्यों की शुरुआत और विवाह जैसे संस्कारों को टालने की परंपरा है। इस अवधि में लोग सांसारिक गतिविधियों की बजाय पूजा-पाठ, व्रत, दान, जप और आत्मचिंतन को अधिक महत्व देते हैं।

चार महीने तक रहेंगे मांगलिक कार्यों पर विराम

चातुर्मास के दौरान मुख्य रूप से चार महीने आते हैं, जिनमें सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास शामिल होते हैं। इन महीनों में विवाह संस्कार, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, तिलक और यज्ञोपवीत जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि इस समय व्यक्ति को अपनी इच्छाओं और जीवनशैली पर नियंत्रण रखते हुए आध्यात्मिक साधना पर ध्यान देना चाहिए।

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चातुर्मास में पूजा, दान और साधना का विशेष महत्व

धार्मिक ग्रंथों में चातुर्मास को साधना और आत्मसंयम का समय बताया गया है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, व्रत, स्नान और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है।

इन चार महीनों में संत-महात्मा भी एक स्थान पर रहकर धार्मिक प्रवचन, ध्यान और साधना करते हैं। मान्यता है कि चातुर्मास में किए गए धार्मिक कार्यों का फल लंबे समय तक मिलता है।

स्कंद पुराण में चातुर्मास का महत्व

स्कंद पुराण में चातुर्मास के महत्व को बताते हुए कहा गया है कि जो व्यक्ति इस अवधि में श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए व्रत और साधना करता है, उसे आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

चातुर्मास 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां

25 जुलाई 2026 – देवशयनी एकादशी, चातुर्मास प्रारंभ
21 नवंबर 2026 – देवउठनी एकादशी, चातुर्मास समाप्त

चातुर्मास का समय धार्मिक अनुशासन, आत्मसंयम और भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इस अवधि में लोग सात्विक जीवन अपनाकर पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों में समय बिताते हैं।

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