बसंत पंचमी2026 पर जानें मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने की सही दिशा और मुद्रा। पढ़ाई, करियर और नौकरी में सफलता पाने के लिए ये Vastu टिप्स जरूर अपनाएं।
बसंत पंचमी (Basant Panchami 2026) विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित प्रमुख पर्व है। यह हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा और आराधना का विशेष महत्व होता है।
बसंत पंचमी2026 Date
इस वर्ष वसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मां सरस्वती का अवतरण हुआ था। इसलिए इस दिन घरों और मंदिरों में विशेष उत्साह के साथ पूजा की जाती है।
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मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने की शुभ दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, मां सरस्वती की मूर्ति सही दिशा में स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। गलत दिशा में मूर्ति स्थापित करने पर पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता। शुभ दिशा और स्थान इस प्रकार हैं:
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पूर्व दिशा – सबसे शुभ दिशा मानी जाती है। इस दिशा में मूर्ति स्थापित करने से साधक को ज्ञान की प्राप्ति और मां सरस्वती की कृपा मिलती है।
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उत्तर-पूर्व दिशा – इस दिशा में मूर्ति रखने से धन में वृद्धि और करियर में सफलता के मार्ग खुलते हैं।
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उत्तर दिशा – सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के लिए उत्तर दिशा में मूर्ति रखना लाभकारी होता है। इससे नौकरी और जॉब में सफलता मिलती है।
मां सरस्वती की मूर्ति किस मुद्रा में होनी चाहिए
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पूजा के लिए कमल के फूल पर बैठी हुई मूर्ति सबसे शुभ मानी जाती है। यह एकाग्रता और विद्या का प्रतीक है।
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मूर्ति के चेहरे पर हमेशा प्रसन्नता का भाव होना चाहिए; उदास मुद्रा वाली मूर्ति पूजा के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती।
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मां सरस्वती के दो हाथों में वीणा होनी चाहिए, जो संगीत और कला का प्रतीक है।