Saturday, July 25, 2026

आमलकी एकादशी 2026: आमलकी एकादशी पर करें ये 7 काम, बदल सकते हैं भाग्य, बन रहे हैं शुभ संयोग

by Versha
आमलकी एकादशी 2026: आमलकी एकादशी पर करें ये 7 काम, बदल सकते हैं भाग्य, बन रहे हैं शुभ संयोग

आमलकी एकादशी 2026: 27 फरवरी को करें आंवले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा। जानें आमलकी एकादशी पर 7 शुभ काम, तिल और गंगाजल से स्नान, आंवले का दान और शुभ योग, जो बदल सकते हैं आपका भाग्य।

आमलकी एकादशी 2026: 27 फरवरी, 2026 को फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी मनाई जाएगी। इसे आंवला या आमलकी एकादशी भी कहते हैं। हिंदू परंपरा में इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ आंवले के पेड़ और माता अन्नपूर्णा की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन आंवले का दान और व्रत करने से सुख-समृद्धि, बाधाओं से मुक्ति और यज्ञों का पुण्य प्राप्त होता है।

आमलकी एकादशी 2026 का समय

प्रारंभ: 27 फरवरी 2026, तड़के 12:33 बजे

समाप्ति: 27 फरवरी 2026, रात 10:32 बजे

आंवले के पेड़ की पूजा का शुभ समय: सुबह 6:48 से 11:08 तक

आमलकी एकादशी पर जरूर करें ये 7 काम

तुलसी के पास दीपक जलाना: शाम को तुलसी के पास दीपक जलाना अनिवार्य है।

भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जप: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।

श्रीकृष्ण का अभिषेक: अभिषेक के दौरान “कृं कृष्णाय नम:” मंत्र का जप करें।

गौ माता की पूजा और दान: किसी गौशाला में गायों की सेवा और दान करें।

मंदिर में पूजन सामग्री दान: कुमकुम, चंदन, मिठाई, तेल-घी, फूल, वस्त्र आदि का दान करें।

आंवले का सेवन और दान: आंवले का रस पिएं और आंवले का दान करें।

माता अन्नपूर्णा की पूजा और अन्नदान: जरूरतमंदों को अन्न का दान करें।

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सूर्योदय से पूर्व स्नान और विशेष विधि

इस दिन सूर्योदय से पहले गंगाजल, तिल और आंवले के साथ स्नान करने की परंपरा है। इसे तीर्थस्नान माना जाता है और ऐसा करने से पाप समाप्त होते हैं।

शुभ योग और रंगभरी एकादशी

इस बार आमलकी एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि, रवि, आयुष्मान और सौभाग्य योग बन रहे हैं। होली से चार दिन पहले आने के कारण इसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं।

पूजा विधि

  • सुबह उठकर व्रत संकल्प लें और स्नान करें।
  • तुलसी और आंवले के पेड़ का पूजन करें।
  • दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • कलश, वस्त्र और आंवले का दान करें।
  • पूजन के बाद भोजन ग्रहण कर व्रत खोलें।

मान्यता है कि आंवले का पूजन और दान करने से व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता है और यज्ञों का फल मिलता है।

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