अधिकमास एकादशी 2026 में पद्मिनी एकादशी 27 मई और परमा एकादशी 11 जून को है। जानें तिथि, महत्व, पूजा और व्रत का धार्मिक फल।
अधिकमास एकादशी 2026: हिंदू पंचांग में अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है, भगवान विष्णु को समर्पित विशेष माह माना जाता है। यह मास हर तीन वर्ष में एक बार आता है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में अधिकमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस दौरान पड़ने वाली एकादशी तिथियों का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि दोनों ही भगवान विष्णु की आराधना से जुड़ी हैं।
अधिकमास में एकादशी का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में किए गए व्रत, पूजा, जप, तप और दान का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस माह में आने वाली एकादशी पर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
2026 में अधिकमास की दो प्रमुख एकादशी
अधिकमास के दौरान शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में दो विशेष एकादशी व्रत रखे जाएंगे। इन्हें पद्मिनी एकादशी और परमा एकादशी के नाम से जाना जाता है।
पद्मिनी एकादशी 2026 कब है?
अधिकमास की शुक्ल पक्ष एकादशी 27 मई 2026 को मनाई जाएगी। इसे पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की उपासना करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है।
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परमा एकादशी 2026 कब है?
अधिकमास की कृष्ण पक्ष एकादशी 11 जून 2026 को पड़ेगी। इसे परमा एकादशी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत धन, ऐश्वर्य और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाला माना जाता है। श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है तथा व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
परमा एकादशी पर दान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं में परमा एकादशी के दिन दान-पुण्य को विशेष महत्व दिया गया है। इस अवसर पर अन्न दान, विद्या दान, गौसेवा, भूमि दान और जरूरतमंदों की सहायता को शुभ माना जाता है। ऐसा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
अधिकमास में किए जाने वाले शुभ कार्य
1. भगवान विष्णु की आराधना
प्रतिदिन भगवान विष्णु का स्मरण और पूजा करना शुभ माना जाता है।
2. तुलसी पूजा
तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाकर पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
3. दान-पुण्य
जरूरतमंद लोगों को अन्न, जल, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना लाभकारी माना गया है।
4. सात्विक जीवनशैली
अधिकमास के दौरान सात्विक भोजन और संयमित जीवन अपनाने की सलाह दी जाती है।
5. धार्मिक ग्रंथों का पाठ
श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ विशेष फलदायी माना गया है।