Tuesday, July 21, 2026

जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के मुद्दे पर AAP प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी का बयान

by Neha
जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के मुद्दे पर AAP प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी का बयान

पेपर लीक से करोड़ों लोग पीड़ित हुए हैं, तो क्या सरकार एक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी नहीं ले सकती?: इसुदान गढ़वी

देश की राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने तीखा हमला करते हुए कहा कि दिल्ली में एकत्र हुए लाखों GenZ (आज की पीढ़ी के) युवाओं को न तो पुलिस डरा सकी है और न ही कोई तानाशाह डरा सका है। देश के युवाओं ने 20 जुलाई के दिन को एक ऐतिहासिक दिन बना दिया है। पेपर लीक की इस गंभीर समस्या से आज देश के करोड़ों लोग पीड़ित हैं। आधिकारिक रूप से लगभग 22 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, तो यदि उनके माता-पिता, भाई-बहन और परिवार के अन्य सदस्यों को जोड़ें तो एक करोड़ से अधिक लोगों के घरों में पेपर लीक का गहरा आघात पहुंचा है। भाजपा ने गुजरात और पूरे देश में लगातार परीक्षाओं के पेपर लीक कराए हैं। सरकार चलाने में या तो वे पूरी तरह अयोग्य हैं या फिर अपने चहेतों को सरकारी व्यवस्था में फिट करने के लिए यह पूरा षड्यंत्र रचकर पेपर लीक कराए जाते हैं। सत्ता में बैठा व्यक्ति चाहे कितना भी अपना क्यों न हो, उसे ईश्वर को साक्षी मानकर जनहित में शासन करना चाहिए और गलत करने वालों को कभी बख्शना नहीं चाहिए। अब तक लगभग 25 पेपर लीक हो चुके हैं, लेकिन किसी भी घोटालेबाज को कड़ी सजा नहीं मिली। अपने चहेतों को MBBS या नौकरियों में पहुंचाने के लिए पूरे देश के मेधावी बेटों-बेटियों के भविष्य की बलि चढ़ा दी गई है। इतना बड़ा दाग लगने के बाद मंत्री या जिम्मेदार लोगों को अपने पद से हट जाना चाहिए, लेकिन इसके बजाय सोनम वांगचुक या जो भी लोग भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध करते हैं, उन्हें पहले से ही देशद्रोही साबित करने या विदेशी फंडिंग लेने के झूठे आरोप लगाए जाते हैं। किसान आंदोलन करें तो उन्हें खालिस्तानी बताया जाता है। देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए कोई व्यक्ति 21-21 दिनों तक अनशन पर बैठता है और केवल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगता है, तब इस्तीफा लेने के बजाय लाखों पुलिस, CRPF और सेना के जवानों को तैनात कर पूरी व्यवस्था ठप कर दी जाती है।

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‘आप’ नेता इसुदान गढ़वी ने आगे कहा कि सत्ता के अहंकार में डूबे नेताओं को यह याद रखना चाहिए कि पूरे विश्व पर राज करने वाला सिकंदर (अलेक्जेंडर) भी जब मरा, तब उसके दोनों हाथ खाली थे। अंधभक्ति में डूबे लोगों को समझना होगा कि जनता के अधिकारों और हितों के लिए ईश्वर को साक्षी मानकर जनहित में निर्णय लेने ही होंगे। वर्ष 2014 से पहले छोटी-छोटी बातों पर ट्वीट करने वाले फिल्म स्टार और क्रिकेटर आज देश के युवाओं पर हो रहे अत्याचारों के समय कहीं दिखाई नहीं देते। गुजरात में जब पेपर लीक हुआ था, तब आम आदमी पार्टी ने कमलम का घेराव कर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। अब अदालतों में तारीख पर तारीख पड़ती रहेगी, केस चलते रहेंगे और सरकारी वकील बचाव करते रहेंगे, इससे कोई वास्तविक समाधान नहीं निकलेगा। यदि इस व्यवस्था को बदलना है, तो जनता को स्वयं जागरूक होना पड़ेगा। भाजपा के पेज प्रमुखों और बूथ प्रमुखों को भी अपनी आत्मा जगाने की जरूरत है। हम सामान्य दिनों में रिश्तेदारी और जातिवाद में उलझ जाते हैं, लेकिन मतदान के दिन इस अन्याय का जवाब देना भूल जाते हैं। जिस दिन मतदान हो, उस दिन प्रत्येक नागरिक को दोपहर 12 बजे तक अपने परिवार, रिश्तेदारों और मित्रों से 100 प्रतिशत मतदान करवाकर इन सत्ताधीशों को करारा जवाब देना होगा। टीवी के सामने बैठे करोड़ों युवा किसी पाकिस्तान या चीन के नहीं, बल्कि हमारे अपने देश के हैं और उन पर लाठीचार्ज करवाने वाली सरकार को चुनाव के दिन सबक सिखाना ही होगा। हमने विपक्ष के रूप में अपना कर्तव्य निभाया है, अब चुनाव के दिन आपको भी एक जागरूक नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य निभाना होगा।

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