सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के फैसले पर रोक लगा दी है। मतदान पर रोक लगाने से कोर्ट ने इनकार कर दिया है। यह फैसला कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान किया।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि चुनाव के नतीजे घोषित नहीं किए। यह आदेश एक पूर्व महिला क्रिकेटर की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने दिया। याचिकाकर्ता ने कहा कि न तो कोई महिला वोटर है और न ही कोई महिला उम्मीदवार चुनाव में हैं। मंगलवार को होने वाले चुनाव पर रोक लगाने की मांग याचिकाकर्ता ने की थी।
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नतीजे घोषित नहीं किए जाएंगे
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई में कहा, “याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों, खासकर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए, हम निर्देश देते हैं कि आज होने वाला चुनाव होगा।” नतीजे, हालांकि, घोषित नहीं किए जाएंगे।सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट को राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव नहीं होने की लंबित याचिका पर निर्णय देने को कहा। बेंच को बताया गया कि चुनाव मंगलवार सुबह 11.30 बजे शुरू होने थे और नतीजे उसी दिन बाद में घोषित किए जाएंगे।
जुलाई में होई कोर्ट में सुनवाई हुई
जुलाई में, राजस्थान सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया गया था, एक लंबित याचिका पर सुनवाई करते हुए। कोर्ट ने कहा कि सभी जिला क्रिकेट एसोसिएशन एडमिनिस्ट्रेटर की देखरेख में रहेंगे जब तक एक रेगुलर कमेटी नहीं बन जाती।
अध्यक्ष पद के लिए नेता पुत्रों की होड़
दूसरी ओर, आरसीए अध्यक्ष पद के लिए पुत्रों का दौरा है। इस बार चुनाव में पांच पुत्र नेता शामिल हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर, विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवारी के बेटे आशीष तिवारी और पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ के पुत्रों ने नामांकन दाखिल किया है। ऐसे में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव को राजनीति में प्रवेश करने का एक सरल उपाय माना जाता है।