Thursday, September 10, 2026

गोपाल इटालिया: विधानसभा सत्र में पूछे गए सवाल से भाजपा सरकार द्वारा रिपोर्ट छिपाने का काला सच सामने आया

by editor
गोपाल इटालिया: विधानसभा सत्र में पूछे गए सवाल से भाजपा सरकार द्वारा रिपोर्ट छिपाने का काला सच सामने आया

गोपाल इटालिया: पाटीदार समाज और ‘पास’ के युवा एकजुट होकर आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करवाने के लिए सरकार के खिलाफ आवाज उठाएं

गांधीनगर में चल रहे विधानसभा मानसून सत्र के दौरान हुई प्रश्नोत्तरी के संबंध में मीडिया से बात करते हुए आम आदमी पार्टी के विसावदर के विधायक गोपाल इटालिया ने बताया कि, आज विधानसभा में १० सितंबर, २०२६ को गृह विभाग से संबंधित मेरे दो सवाल और उद्योग विभाग से संबंधित एक सवाल था। इस तरह कुल तीन अति महत्वपूर्ण सवाल मैंने विधानसभा में रखे थे, जिनमें से अभी मुझे चौंकाने वाली जानकारी मिली है। सबसे पहला मुद्दा पाटीदार आरक्षण आंदोलन का है। मुझे याद है कि हम स्वयं आंदोलन में जुड़े हुए थे और २५वीं तथा २६वीं अगस्त २०१५ को भयानक हिंसा हुई थी। भाजपा के गुंडों ने पुलिस के साथ मिलकर कई जगहों पर पाटीदार समाज के निर्दोष युवाओं, माताओं और बहनों को बुरी तरह पीटा था। पुलिस ने गैरकानूनी तरीके से गोलीबारी की और पाटीदार युवाओं को गोलियां मारीं, जिसमें करीब १४ युवा शहीद हुए थे। कई जगहों पर भाजपा के गुंडों और पुलिस के साथ मिले तोड़फोड़ करने वालों ने पुलिस के वाहनों को जला दिया था और २०१५ में आरक्षण आंदोलन के दौरान कई प्रकार की हिंसात्मक घटनाएं हुई थीं। इसके बाद इसी भाजपा सरकार ने जस्टिस के.ए. पूंज आयोग की नियुक्ति की थी। उस समय भाजपा के नेताओं और सरकार ने कहा था कि आंदोलन के दौरान जो भी हिंसा हुई है, उसकी विस्तृत जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस के.ए. पूंज करेंगे। इस आयोग के समक्ष मैं स्वयं भी एफिडेविट के माध्यम से एक गवाह के रूप में उस समय प्रस्तुत हुआ था और जांच में मुझे जो कुछ दर्ज करवाना था, वह मैंने लिखवाया था।

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गोपाल इटालिया ने आगे कहा कि, जस्टिस के.ए. पूंज आयोग ने पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान युवाओं और महिलाओं पर पुलिस द्वारा किए गए अत्याचार की सभी घटनाओं की जांच कर एक रिपोर्ट गुजरात सरकार को ८-७-२०२० को दे दी है। तो फिर सरकार ने इस रिपोर्ट को दबाकर क्यों रखा है? जिस आयोग ने पाटीदार युवाओं और महिलाओं पर पुलिस द्वारा किए गए अत्याचार की जांच की, उसमें किन पुलिसवालों की गलती थी, किसने आदेश दिए, किसके कहने पर दिए, किन-किन जगहों पर किस तरह का अत्याचार हुआ—यह सब लिखकर २०२० में सरकार को सौंप दिया गया है। फिर भी सरकार ने आज दिन तक इस रिपोर्ट को दबाकर और छिपाकर रखा है, जिसे विधानसभा के समक्ष सार्वजनिक करना चाहिए। आज मैंने पूछा कि इस रिपोर्ट के मिलने के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए, तो सरकार ने मुझे लिखित में दिया है कि कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि दोषियों को बचाया गया है और भाजपा नेताओं के इशारे पर गोलीबारी करने वाले तथा महिलाओं और पाटीदार युवाओं को मारने वाले पुलिसवालों को सरकार ने पूरी तरह बचा लिया है। आज विधानसभा सदन के सवाल के माध्यम से जो जानकारी सामने आई है, उसके लिए मैं पूरे गुजरात के पाटीदार समाज के सभी नेताओं, बुजुर्गों और खासकर ‘पास’ (PAAS) से जुड़े युवाओं से विनती करता हूं कि आप सरकार से कहें कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करे और दोषी पुलिसवालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।

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