Thursday, August 13, 2026

दूर्वा गणेश चतुर्थी 2026: 16 अगस्त को मनाई जाएगी दूर्वा गणेश चतुर्थी, जानें पूजा मुहूर्त और उपाय

by Neha
दूर्वा गणेश चतुर्थी 2026: 16 अगस्त को मनाई जाएगी दूर्वा गणेश चतुर्थी, जानें पूजा मुहूर्त और उपाय

दूर्वा गणेश चतुर्थी 2026 इस साल 16 अगस्त को मनाई जाएगी। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, दूर्वा चढ़ाने की विधि, धार्मिक उपाय और गणेश जी की पूजा का महत्व।

दूर्वा गणेश चतुर्थी 2026: सावन महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। साल 2026 में दूर्वा गणेश चतुर्थी 16 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन गणपति बप्पा को विशेष रूप से दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित मानी जाती है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और दोपहर के समय गणेश जी की पूजा करते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से बप्पा की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

दूर्वा गणेश चतुर्थी 2026 की तारीख और तिथि

पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल चतुर्थी तिथि 15 अगस्त 2026 की शाम 5:28 बजे शुरू होगी और 16 अगस्त 2026 की शाम 4:52 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर दूर्वा गणेश चतुर्थी का व्रत 16 अगस्त को रखा जाएगा।

गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त

दूर्वा गणेश चतुर्थी: 16 अगस्त 2026, रविवार
पूजा का समय: सुबह 11:06 बजे से दोपहर 1:44 बजे तक
पूजा की अवधि: लगभग 2 घंटे 38 मिनट

इस दौरान भगवान गणेश की पूजा करके उन्हें दूर्वा, सिंदूर, मोदक और लड्डू अर्पित किए जा सकते हैं।

बच्चों के लिए करें दूर्वा गणेश चतुर्थी का ये उपाय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दूर्वा गणेश चतुर्थी के दिन बच्चों से भगवान गणेश की पूजा करवाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान गणपति को दूर्वा की 11 गांठें अर्पित की जा सकती हैं।

मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चे की एकाग्रता और बुद्धि के विकास की कामना की जाती है। यदि बच्चे का पढ़ाई में मन कम लगता है या उसका ध्यान जल्दी भटकता है, तो इस दिन गणेश जी की पूजा करवाना शुभ माना जाता है। गणेश जी को दूर्वा और सिंदूर अर्पित करने के बाद मोदक या लड्डू का भोग लगाया जा सकता है।

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पूजा के बाद करें मंत्र का जाप

बच्चे से गणेश जी की पूजा करवाने के बाद बुद्धि और ज्ञान की कामना के लिए मंत्र जाप भी कराया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंत्र का 11 बार जाप किया जाता है:

त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
अनित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय॥”

मान्यता है कि मंत्र जाप से बुद्धि, विवेक, ज्ञान और एकाग्रता के लिए भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

गणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?

भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कथा के अनुसार, अनलासुर नामक दैत्य के आतंक से देवता, ऋषि और सामान्य लोग परेशान थे। वह अपने अत्याचारों से तीनों लोकों में भय का वातावरण पैदा कर रहा था। देवताओं और ऋषियों ने भगवान शिव से सहायता मांगी। तब शिवजी ने बताया कि गणेश जी ही अनलासुर का अंत कर सकते हैं।

इसके बाद गणेश जी ने अनलासुर का सामना किया और उसे निगल लिया। लेकिन इसके बाद उनके पेट में तेज जलन होने लगी। कई उपाय करने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली।

कहा जाता है कि तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें बनाकर गणेश जी को अर्पित कीं। दूर्वा ग्रहण करने के बाद गणपति के पेट की जलन शांत हो गई। इसी कथा के आधार पर भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।

दूर्वा गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें पूजा

दूर्वा गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करके उनका ध्यान करें।

गणेश जी को जल, सिंदूर, दूर्वा और फूल अर्पित करें। इसके बाद मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करके परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

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