मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर जगतार सिंह हावारा के लिए 10 दिन की पैरोल मांगी। सरकार ने कानून-व्यवस्था का भरोसा दिया।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर जगतार सिंह हावारा के लिए 10 दिन की पैरोल की मांग की। हावारा पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद दिल्ली की मंडोली जेल में सजा काट रहा है।
मुख्यमंत्री ने पैरोल की मांग को मुख्य रूप से मानवीय आधार से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि हावारा की बुजुर्ग मां की तबीयत खराब है और वह लंबे समय से अपने बेटे से मिलने की इच्छा रखती हैं। मान के मुताबिक, मामले को तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है, इसलिए इस अनुरोध को मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
कानून-व्यवस्था को लेकर पंजाब सरकार का आश्वासन
भगवंत मान ने कहा कि यदि हावारा को अस्थायी पैरोल दी जाती है तो पंजाब सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने राज्यपाल को भरोसा दिलाया कि पैरोल अवधि के दौरान किसी तरह की नारेबाजी, विरोध या ऐसी गतिविधि नहीं होने दी जाएगी जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो।
मुख्यमंत्री के अनुसार, हावारा की पैरोल की मांग से जुड़े सिख संगठनों ने भी प्रशासन के साथ सहयोग करने और शांति बनाए रखने का भरोसा दिया है।
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पैरोल मामले में कई स्तरों पर होगी प्रक्रिया
मान ने बताया कि मामला दिल्ली और चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़ा होने के कारण पैरोल की प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों की भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने 10 दिन की पैरोल के लिए औपचारिक अनुरोध किया है।
हालिया न्यायिक प्रक्रिया में भी हावारा की पैरोल याचिका पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जुलाई 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को पैरोल आवेदन पर निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
राज्यपाल ने केंद्र के समक्ष मामला उठाने का दिया भरोसा
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बैठक के बाद कहा कि राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने मामले को केंद्र सरकार के समक्ष रखने का आश्वासन दिया है। मान ने उम्मीद जताई कि आवश्यक औपचारिकताएं जल्द पूरी होंगी और हावारा को अपनी बीमार मां से मिलने का अवसर मिल सकता है।
जगतार सिंह हावारा की पैरोल का मामला पिछले कुछ समय से कानूनी और राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। जनवरी 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी अधिकारियों को उनकी लंबित पैरोल अर्जी पर जवाब देने का निर्देश दिया था।
मानवीय आधार पर पैरोल की मांग
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार की ओर से किया गया अनुरोध किसी राजनीतिक गतिविधि के बजाय मानवीय परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए है। उनका कहना है कि एक बीमार और बुजुर्ग मां की अपने बेटे से मुलाकात की इच्छा को मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
अब इस मामले में संबंधित प्रशासनिक और केंद्रीय स्तर की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। पैरोल मंजूर होगी या नहीं, इसका अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा मौजूदा नियमों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा।