Tuesday, August 4, 2026

सावन कालाष्टमी 2026: सावन की कालाष्टमी कब है? जानें काल भैरव पूजा का महत्व, शुभ मुहूर्त और विधि

by Neha
सावन कालाष्टमी 2026: सावन की कालाष्टमी कब है? जानें काल भैरव पूजा का महत्व, शुभ मुहूर्त और विधि

सावन कालाष्टमी 2026 कब है? जानें सावन कालाष्टमी की तारीख, काल भैरव पूजा मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और भगवान शिव के इस स्वरूप की खास बातें।

सावन कालाष्टमी 2026: सावन महीने में भगवान शिव और उनके विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसी पवित्र महीने में आने वाली सावन कालाष्टमी 2026 भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप भगवान काल भैरव की आराधना के लिए बेहद खास मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव की पूजा करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा, शत्रु बाधा और परेशानियों से मुक्ति मिलने की कामना की जाती है।

सावन कालाष्टमी 2026 का पर्व 5 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करते हैं और जीवन में सुख-शांति तथा सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।

सावन कालाष्टमी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 5 अगस्त 2026 को रात 8 बजकर 42 मिनट से शुरू होगी और 6 अगस्त 2026 को शाम 6 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी। काल भैरव की पूजा के लिए निशिता काल का समय विशेष माना जाता है, लेकिन गृहस्थ लोग अपनी सुविधा के अनुसार सुबह के समय भी पूजा कर सकते हैं। काल भैरव पूजा का शुभ समय सुबह 9 बजकर 06 मिनट से दोपहर 2 बजकर 08 मिनट तक रहेगा।

भगवान शिव ने क्यों लिया काल भैरव का स्वरूप?

धार्मिक ग्रंथों में भगवान काल भैरव को भगवान शिव का उग्र और रक्षक रूप बताया गया है। शिव पुराण के अनुसार, जब ब्रह्माजी के अहंकार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए आवश्यकता पड़ी, तब भगवान शिव के तेज से काल भैरव का प्राकट्य हुआ।

मान्यता है कि काल भैरव ने ब्रह्माजी के पांचवें सिर को अलग किया था। इसी कारण उन्हें धर्म के रक्षक और दंडनायक के रूप में पूजा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि काल भैरव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और बुरी शक्तियों से बचाते हैं।

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काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए क्या चढ़ाएं?

काल भैरव की पूजा में काले तिल का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करने और “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जाप करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।

इसके अलावा शमी के पत्ते अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे ग्रह दोष और जीवन की बाधाओं को शांत करने में सहायता मिलती है।

गृहस्थ लोग कैसे करें काल भैरव की पूजा?

काल भैरव को केवल तांत्रिक साधना के देवता के रूप में ही नहीं, बल्कि न्याय, धर्म और भक्तों की रक्षा करने वाले देवता के रूप में भी पूजा जाता है। गृहस्थ लोग सरल विधि से उनकी आराधना कर सकते हैं।

कालाष्टमी के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद काल भैरव मंदिर में जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पूजा में काले तिल, नारियल, उड़द, फूल और मौसमी फल अर्पित करें।

भगवान काल भैरव को जलेबी या इमरती का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। इसके साथ ही काल भैरव अष्टक का पाठ करने और अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखने की मान्यता है। पूजा के बाद काले कुत्ते को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है।

सावन कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

सावन कालाष्टमी भगवान शिव के काल भैरव स्वरूप की कृपा पाने का विशेष अवसर मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की कामना की जाती है।

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