जामखंभालिया में जीएसपीएल की कार्यवाही के खिलाफ धरने पर बैठे किसानों के समर्थन में आए AAP प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी
जामखंभालिया में जीएसपीएल की कार्यवाही के खिलाफ धरने पर बैठे किसानों के समर्थन में आकर AAP प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने एक वीडियो के माध्यम से अपनी बात रखते हुए बताया कि मैं आज जामखंभालिया के दौरे पर आया हूं और यहां जो किसान जीएसपीएल की पाइपलाइन की कार्यवाही के विरोध में अनशन और धरने पर बैठे हैं, मैंने उन किसानों से मुलाकात की। किसानों को यहां सिर्फ बीघे सवा लाख रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है, गैस की लाइन ओखा तक जा रही है, जिसके कारण लगभग 32 गांव प्रभावित होने वाले हैं। भाजपा ने कुछ गांवों में प्रस्ताव नहीं थे तो सरपंचों पर दबाव भी डलवाया है और लोगों को डराने की भी कोशिश की गई है, अधिकारी बात नहीं सुनते और पुलिस प्रोटेक्शन के बीच कार्यवाही शुरू की गई है। आज किसानों ने 2022 में भी विरोध किया था, हालांकि उसे भी मान्य नहीं रखा गया था। तब मैं ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल मंत्री को बताना चाहता हूं कि आप जहां सवा लाख रुपये बीघा जमीन दे रहे हैं, ऐसी जगह पर हमें किसानों को 1000 बीघा जमीन चाहिए, अगर आपमें हिम्मत है तो दो। यहां 60 से 70 लाख रुपये की एक बीघा जमीन की कीमत बताई जा रही है और आप सरकारी काम के नाम पर अधिग्रहण करके काम चला रहे हैं। आप यहां सिर्फ एक साल की उपज का मुआवजा दे रहे हैं और सातबारा में पक्की एंट्री भी कर ली है, तो यह किसानों पर अत्याचार है और किसान विरोधी भाजपा की मानसिकता उजागर हो गई है। किसान अब एकजुट हो गए हैं और किसानों ने तय किया है कि अगर इस गैस पाइपलाइन में किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलेगा तो यह कार्यवाही नहीं होने दी जाएगी और इस मामले में हमारा भी सहयोग है। मैं यहां किसी राजनीतिक नेता के रूप में नहीं बल्कि किसान के बेटे के रूप में आया हूं। किसानों को जहां भी जरूरत होगी, मैं उनका साथ दूंगा।
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इसके अलावा आम आदमी पार्टी के नेता इसुदान गढ़वी ने बताया कि मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से मैं सवाल करना चाहता हूं कि इन किसानों ने आपको भर-भरकर वोट दिए हैं तो आप इनके साथ यह क्या कर रहे हैं? इन्हीं किसानों ने जिला पंचायत, तालुका पंचायत, नगरपालिका, महानगरपालिका, विधायक, सांसद सभी बनाकर दिए और आप हमें बदले में यह दे रहे हैं? आपने फिलहाल हाईटेंशन लाइन के मामले में जो समिति बनाई है, वह भी इसमें लागू होती है। आप कहते हैं कि “ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स की कार्यवाही” तो चाहे वह हाईटेंशन हो या अंडरग्राउंड हो, तो बाजार कीमत प्लस आप 200 प्रतिशत कहते हैं, उस मुआवजे की भी यहां बात नहीं हो रही है। तो अगर मुआवजे के बिना कार्यवाही होगी तो हम किसानों के साथ खड़े हैं और सरकार से कहना चाहते हैं कि किसान जागरूक हो गए हैं तो उनकी जागरूकता की परीक्षा मत लेना। और अगर आपमें हिम्मत है तो अपने खेतों में गैस की पाइपलाइन डालो। किसानों की बेशकीमती जमीन पर कब्जा करना बंद करो। आप फसल बीमा नहीं देते, अच्छा भाव नहीं देते, अच्छा बीज नहीं देते, कीटनाशक दवाइयां नकली आ रही हैं, हमारे किसानों के पास अब सिर्फ जमीनें ही बची हैं, दूसरा कुछ नहीं बचा है और उस पर आप जबरदस्ती काम कर रहे हैं, ऐसा काम तो अंग्रेज भी नहीं करते थे। ऐसा न हो कि आपने यह कार्यवाही बंद नहीं की तो पूरे गुजरात के 54 लाख किसान गांधीनगर में एकजुट हो जाएं। सरकारी या प्राइवेट काम के लिए चाहे कोई हाई टेंशन लाइन हो या अंडरग्राउंड कोई लाइन हो, उसमें उचित मुआवजे की एक नीति तय करने के बाद किसानों के खेत में घुसो, ऐसी मेरी विनती है। मैं तंत्र से भी अपील करता हूं कि सरकार के कहने पर आप किसानों के साथ जबरदस्ती न करें, वरना भविष्य में आपके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।