Tuesday, July 21, 2026

Jagannath Temple Tradition: जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ के सामने क्यों नहीं बजाया जाता शंख? जानें सदियों पुरानी मान्यता

by Versha
Jagannath Temple Tradition: जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ के सामने क्यों नहीं बजाया जाता शंख? जानें सदियों पुरानी मान्यता

पुरी जगन्नाथ मंदिर में भगवान के सामने शंख क्यों नहीं बजाया जाता? जानें इस प्राचीन परंपरा, धार्मिक मान्यता और मंदिर से जुड़े अनोखे नियम।

Jagannath Temple Mystery: हिंदू धर्म में शंख को बेहद पवित्र माना जाता है। किसी भी पूजा, आरती या शुभ कार्य की शुरुआत अक्सर शंखनाद से की जाती है। मान्यता है कि शंख की ध्वनि से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वातावरण पवित्र होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर में एक ऐसी परंपरा है, जहां भगवान के सामने शंख बजाना वर्जित माना जाता है।

पुरी का श्रीजगन्नाथ मंदिर अपनी अनोखी पूजा पद्धति, परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की पूजा सदियों से चली आ रही विधि-विधान के अनुसार की जाती है।

भगवान जगन्नाथ मंदिर में शंख क्यों नहीं बजाया जाता?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीजगन्नाथ मंदिर की सेवा व्यवस्था बेहद अनुशासित और विशेष मानी जाती है। यहां भगवान की सेवा में इस्तेमाल होने वाली हर वस्तु की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

परंपरा के अनुसार, शंख बजाने के लिए उसमें मुंह से फूंक मारी जाती है। सनातन मान्यता में मुंह से स्पर्श की गई वस्तु को जूठा माना जाता है। इसी वजह से भगवान जगन्नाथ की प्रत्यक्ष सेवा के दौरान शंख का उपयोग नहीं किया जाता।

यही कारण है कि मंदिर के गर्भगृह और भगवान के सामने शंखनाद करने की परंपरा नहीं है।

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क्या पूरे जगन्नाथ मंदिर में शंख बजाना प्रतिबंधित है?

भगवान जगन्नाथ मंदिर में शंख बजाने की मनाही मुख्य रूप से गर्भगृह और भगवान की विशेष सेवा के समय मानी जाती है। मंदिर की पूजा-पद्धति पूरी तरह प्राचीन नियमों और परंपराओं के अनुसार संचालित होती है।

हालांकि, अन्य धार्मिक अवसरों और मंदिर परिसर के अलग-अलग हिस्सों में शंखनाद को लेकर परंपराएं अलग हो सकती हैं। मंदिर की मुख्य सेवा व्यवस्था में शुद्धता और नियमों का विशेष पालन किया जाता है।

2026 में कब निकलेगी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा?

भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा साल 2026 में 16 जुलाई से शुरू होगी। यह यात्रा 24 जुलाई 2026 को बहुदा यात्रा के साथ संपन्न होगी।

रथयात्रा के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। इस दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देते हैं।

जगन्नाथ मंदिर की अनोखी परंपराएं

पुरी का जगन्नाथ मंदिर अपनी कई विशेष मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान को प्रतिदिन छप्पन भोग अर्पित किया जाता है। मंदिर की रसोई भी अपनी विशाल व्यवस्था के लिए जानी जाती है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद तैयार किया जाता है।

इसके अलावा मंदिर की कई सेवाएं और पूजा विधियां आज भी सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार निभाई जाती हैं।

रथयात्रा का धार्मिक महत्व

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को आस्था और भक्ति का बड़ा पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं और सभी को दर्शन देते हैं।

रथयात्रा में शामिल होना और भगवान जगन्नाथ के रथ के दर्शन करना भक्तों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। यह पर्व समानता और भक्ति का संदेश भी देता है।

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