अमृतसर में पहली बार नाइट स्वीपिंग ड्राइव शुरू, रात 10 से 2 बजे तक सफाई। हरजोत सिंह बैंस ने निरीक्षण किया, शहर को 24 घंटे स्वच्छ बनाने की पहल।
श्री अमृतसर साहिब केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक पवित्र धरोहर और आस्था का प्रतीक है, जिसकी स्वच्छता और गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए शहर में पहली बार नाइट स्वीपिंग (रात्रिकालीन सफाई अभियान) की शुरुआत की गई है।
इस नई पहल के तहत नगर निगम की टीमें प्रतिदिन रात 10 बजे से सुबह 2 बजे तक शहर की प्रमुख सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई कर रही हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य दिन के समय होने वाली भीड़ और ट्रैफिक को प्रभावित किए बिना शहर को अधिक प्रभावी तरीके से स्वच्छ बनाना है।
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हरजोत सिंह बैंस ने किया मौके पर निरीक्षण
पंजाब के शिक्षा एवं सूचना मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस नाइट स्वीपिंग ड्राइव का मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने सफाई कार्य में लगे कर्मचारियों से बातचीत की और पूरी व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अमृतसर की पवित्रता और स्वच्छता सरकार की प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल है और इसे हर हाल में बनाए रखना जरूरी है।
Sri Amritsar Sahib is not just a city — it’s a sacred trust.
Tonight, on ground zero, inspecting our newly introduced night sweeping drive — teams working from 10 PM to 2 AM to keep this holy city clean through the night.
For the first time, cleanliness in Amritsar goes beyond… pic.twitter.com/OPQcrAKvdF
— Harjot Singh Bains (@harjotbains) June 15, 2026
अमृतसर में पहली बार 24 घंटे स्वच्छता मॉडल
यह पहली बार है जब अमृतसर में स्वच्छता व्यवस्था को 24 घंटे मॉडल के रूप में लागू किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, रात के समय सफाई अभियान चलाने से काम अधिक व्यवस्थित तरीके से हो पाएगा और दिन के समय शहर की गतिविधियों में कोई बाधा नहीं आएगी। इस पहल से कचरा प्रबंधन, सड़क सफाई और सार्वजनिक स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी।
स्वच्छ और स्मार्ट तीर्थ नगरी की दिशा में कदम
प्रशासन का मानना है कि यह पहल अमृतसर को एक आदर्श स्वच्छ तीर्थ शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लगातार निगरानी और रात की शिफ्ट में काम करने वाली टीमों के जरिए शहर की सफाई व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। यह पहल आने वाले समय में अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।