उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ ने धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज समेत छोटे धार्मिक शहरों में आधारभूत संरचना के विकास से न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ी है, बल्कि स्थानीय व्यापार, रोजगार और निवेश में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
धार्मिक स्थलों का आधुनिक विकास
मॉडल के तहत प्रमुख धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण, घाटों का विकास, सड़क चौड़ीकरण, आधुनिक यात्री सुविधाएं, पार्किंग, सुरक्षा प्रबंधन और स्वच्छता सुनिश्चित की गई। इसका प्रत्यक्ष परिणाम यह हुआ कि प्रदेश में बीते साल 122 करोड़ से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे।
अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज का परिवर्तन
अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर का भव्य विकास, वाराणसी में घाटों और काशी क्षेत्र का पुनर्निर्माण और प्रयागराज में संगम क्षेत्र व महाकुंभ आयोजन ने टेंपल इकॉनमी मॉडल की सफलता साबित की। छोटे धार्मिक नगरों जैसे मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य और विंध्याचल में भी इस पहल के तहत स्थानीय व्यापार और सेवाक्षेत्र में वृद्धि हुई है।
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स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार में बढ़त
रिपोर्टों के अनुसार अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद होटल, होमस्टे, एमएसएमई और रियल एस्टेट में तेज वृद्धि हुई। छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी व्यवसायी और हस्तशिल्प उद्योग भी इससे लाभान्वित हुए। इसी तरह, अन्य धार्मिक स्थलों में सुविधाओं के विकास से स्थानीय उत्पादों, होटल व्यवसाय, परिवहन सेवाओं और गाइड सेवाओं में विस्तार हुआ और हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिले।
आस्था और अर्थव्यवस्था का समन्वय
टेंपल इकॉनमी मॉडल का मूल विचार है कि धार्मिक स्थलों का व्यवस्थित विकास न केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का माध्यम बनता है, बल्कि निवेश, व्यापार और रोजगार का भी आधार तैयार करता है। प्रदेश सरकार ने नगर विकास के लिए ₹26,514 करोड़ का बजट आवंटित किया है, जिससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके।
नवीन दृष्टिकोण: सनातन अर्थशास्त्र से आधुनिक नीति तक
विशेषज्ञों के अनुसार, 122 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन दर्शाता है कि धार्मिक-आस्था केंद्र अब “इमोशनल स्पेस” से “इकोनॉमिक जोन” में परिवर्तित हो चुके हैं। योगी सरकार ने पारंपरिक ग्राम-नगर-तीर्थ संरचना को आधुनिक अवसंरचना और नीति के साथ जोड़कर ऐसा मॉडल पेश किया है, जो आस्था को आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सक्षम बनाता है।