स्वस्थ रहने के लिए नियमित रूप से Full body checkup कराना आवश्यक है। Full body checkup कराने से कई बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
Full body checkup : आज की व्यस्त जीवनशैली में हम अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार बीमारियां शरीर में धीरे-धीरे विकसित होती रहती हैं, लेकिन जब तक लक्षण उभरते हैं, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी होती है। ऐसे में नियमित रूप से Full body checkup कराना बेहद जरूरी है। इससे बीमारियों का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है। कई रोग बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ते रहते हैं, लेकिन चेकअप के जरिए उन्हें समय रहते पहचाना जा सकता है। समय पर इलाज मिलने से बीमारी गंभीर होने से बचती है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है।
इसलिए यह जानना जरूरी है कि आपको कौन-कौन से टेस्ट करवाने चाहिए और इनके क्या फायदे हैं। आजकल हम प्रदूषित और टॉक्सिक माहौल में रह रहे हैं, जहां खराब खानपान और असंतुलित जीवनशैली के कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके अलावा, जेनेटिक कारणों से भी कुछ बीमारियों का खतरा बना रहता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेकर Full body checkup करवाने से संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सकता है।
Full body checkup के फायदे
किसी भी टेस्ट या स्कैन कराने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। वे बताते हैं कि कैंसर की जांच सिर्फ ब्लड टेस्ट से संभव नहीं होती। इसके लिए अलग-अलग टेस्ट किए जाते हैं, जैसे—महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए पैप स्मीयर टेस्ट और ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए मेमोग्राम। वहीं, जो लोग धूम्रपान करते रहे हैं, उन्हें लंग्स की जांच के लिए लो-डोज सीटी स्कैन करवाने की सलाह दी जाती है।
Full body checkup में ब्लड टेस्ट के अलावा पेट का अल्ट्रासाउंड करवाना भी जरूरी होता है। हृदय स्वास्थ्य के लिए बीपी टेस्ट, शुगर टेस्ट और ईकोकार्डियोग्राफी किए जाते हैं। जिन लोगों के परिवार में हार्ट अटैक का इतिहास रहा है, उनके लिए सीटी एंजियोग्राफी कराना फायदेमंद हो सकता है।किसी भी बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगने से उसका इलाज करना आसान हो जाता है, इसलिए सही समय पर जरूरी टेस्ट कराना आवश्यक है।
हार्ट हेल्थ के लिए टेस्ट
ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ईसीजी टेस्ट से हृदय की सेहत का आकलन किया जाता है, जिससे हृदय रोगों से बचाव संभव है।
किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट
- लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT): लिवर की कार्यक्षमता जांचने और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का पता लगाने के लिए।
- किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT): किडनी से जुड़ी बीमारियों की पहचान के लिए जरूरी।
लिपिड प्रोफाइल और यूरीन टेस्ट
कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर की जांच के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट किया जाता है। ब्लड और यूरीन टेस्ट से शरीर में किसी भी असंतुलन का पता चल सकता है, जिससे समय पर इलाज किया जा सके।
हड्डियों की मजबूती की जांच
कैल्शियम और विटामिन डी टेस्ट से हड्डियों की सेहत का आकलन किया जाता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।
थायरॉइड फंक्शन टेस्ट
टीएसएच टेस्ट के जरिए यह जांचा जाता है कि थायरॉइड ग्रंथि सही तरीके से काम कर रही है या नहीं। इससे थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है।