उत्तराखंड: वीबी-जी राम जी अधिनियम से ग्रामीण भारत को नई दिशा, हिमालयी राज्यों को 90% केंद्रीय सहायता

by Neha
उत्तराखंड: वीबी-जी राम जी अधिनियम से ग्रामीण भारत को नई दिशा, हिमालयी राज्यों को 90% केंद्रीय सहायता

उत्तराखंड सहित हिमालयी राज्यों को VB-G RAM-G अधिनियम के तहत 90% केंद्रीय वित्तीय सहयोग, ग्रामीण रोजगार 125 दिन और आपदा प्रबंधन में नई पहल।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM-G Act) देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांवों का समग्र विकास ही देश की प्रगति की कुंजी है।

सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि यह नया अधिनियम केवल मनरेगा का नाम परिवर्तन नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को अधिक सशक्त, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने की व्यापक पहल है।

हिमालयी राज्यों को विशेष राहत, केंद्र देगा 90 प्रतिशत वित्तीय सहयोग

मुख्यमंत्री धामी ने जानकारी दी कि नए अधिनियम के तहत सामान्य राज्यों को केंद्र व राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में वित्तीय सहायता मिलेगी, जबकि हिमालयी राज्यों को विशेष श्रेणी में रखते हुए 90:10 का अनुपात तय किया गया है।
उत्तराखंड समेत सभी पर्वतीय राज्यों में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत और राज्य सरकार केवल 10 प्रतिशत व्यय वहन करेगी, जिससे राज्य पर आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा।

ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़े, अब मिलेंगे 125 दिन का काम

नई योजना के अंतर्गत ग्रामीण श्रमिकों को अब 100 की जगह 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा, जो पहले की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है।
यदि 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया गया, तो बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा। भुगतान एक सप्ताह के अंदर किया जाएगा और देरी की स्थिति में मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है।

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आपदा प्रबंधन और जल संरक्षण पर विशेष फोकस

पर्वतीय और आपदा-संवेदनशील राज्य उत्तराखंड के लिए यह अधिनियम बेहद उपयोगी साबित होगा। इसके तहत:

  • जल संरक्षण परियोजनाएं

  • आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्य

  • ग्रामीण आधारभूत ढांचे का विकास

को प्राथमिकता दी जाएगी। एसबीआई की एक विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार इस अधिनियम से राज्यों को लगभग 17,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होने का अनुमान है।

आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता

योजना के क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिसमें शामिल हैं:

  • बायोमेट्रिक उपस्थिति

  • जियो-टैगिंग

  • GIS मैपिंग

  • मोबाइल एप और सार्वजनिक डैशबोर्ड

  • AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन

  • साल में दो बार अनिवार्य सोशल ऑडिट

इससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और योजनाओं की निगरानी मजबूत होगी।

किसानों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित

किसानों को मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए फसल की बुवाई और कटाई के मौसम में अधिकतम 60 दिनों तक योजना के कार्य कानूनी रूप से रोके जा सकेंगे। इससे कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

ग्राम पंचायत तय करेंगी विकास कार्य

इस अधिनियम के तहत किसी भी कार्य को ऊपर से थोपने की व्यवस्था नहीं होगी।
ग्राम पंचायतें और ग्राम सभाएं स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्य तय करेंगी। कम से कम 50 प्रतिशत कार्य सीधे ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जाएंगे।

प्रमुख कार्यों में शामिल होंगे:

  • तालाब, चेकडैम और जल संरचनाएं

  • ग्रामीण सड़कें, नालियां और ड्रेनेज

  • स्कूल, अस्पताल

  • स्वयं सहायता समूहों के शेड

  • स्किल सेंटर और ग्रामीण हाट

  • रिटेनिंग वॉल और आपदा सुरक्षा कार्य

विकसित गांव से विकसित भारत की ओर कदम

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह अधिनियम किसानों को सुरक्षा, श्रमिकों को रोजगार, महिलाओं को सम्मान और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधायक दलीप रावत और महासचिव कुंदन परिहार भी उपस्थित रहे।

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