Sunday, April 19, 2026

उत्तराखंड जमीन विवाद: सीएम धामी ने दी कड़ी चेतावनी, कहा ‘कानून के आगे सभी बराबर’

by Neha
उत्तराखंड जमीन विवाद: सीएम धामी ने दी कड़ी चेतावनी, कहा ‘कानून के आगे सभी बराबर’

उत्तराखंड में धौलास इलाके का जमीन विवाद बढ़ा राजनीतिक गर्मी, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा ‘कानून के आगे सभी बराबर’, अवैध आवंटन पर होगी कड़ी कार्रवाई।

उत्तराखंड के धौलास क्षेत्र में जमीन को लेकर उठे विवाद ने राजनीति में गर्मी पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य किसी भी अवैध या अनुचित जमीन सौदे को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाने का आश्वासन दिया। यह विवाद न केवल स्थानीय राजनीति में बहस का विषय बना है, बल्कि प्रशासनिक और सुरक्षा जिम्मेदारी की गंभीरता को भी उजागर करता है।

विवाद की पृष्ठभूमि: जमीन का कथित गलत उपयोग

धौलास इलाके में यह विवाद उस जमीन को लेकर उभरा है जो भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के पास स्थित है। पहले यह जमीन अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान के लिए आवंटित बताई जा रही थी, लेकिन बाद में इसे कथित रूप से रिहायशी प्लॉटों के लिए विकसित किया जा रहा था। इससे न केवल सुरक्षा के सवाल उठे, बल्कि कानूनी रूप से भी कई मुद्दे सामने आए। सीएम धामी ने तुरंत जांच के आदेश दिए हैं और कहा कि किसी भी गड़बड़ी या अवैध आवंटन का पता चलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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सीएम धामी का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड “देवभूमि” है और यहां कोई भी अवैध जमीन सौदा या भूमि का गलत उपयोग स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जमीन को सरकारी नियंत्रण में लौटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

राजनीतिक प्रभाव

इस विवाद ने राज्य की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। विपक्ष के कुछ नेता इसे पिछली सरकारों के समय हुए आवंटन से जोड़ रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि भूमि का अनुचित उपयोग किया गया। सीएम धामी ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पुराना मामला ही क्यों न हो, वर्तमान समय में कानून और सुरक्षा मानकों के आधार पर उचित कार्रवाई जरूरी है।

प्रशासनिक कदम

मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद विकासनगर उप-मत्स्य अधिकारी द्वारा प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि जमीन का वास्तविक इतिहास क्या है, कब और किसके द्वारा आवंटन हुआ, और वर्तमान में इसका उपयोग कैसे हो रहा है। यदि जांच में कोई अवैध गतिविधि सामने आती है, तो दोषियों को सख्त सजा और जमीन का जप्ती आदेश जारी किया जाएगा।

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