Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath : अवसंरचना विकास के लिए कुल 1,79,131.04 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

by editor
Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath: A total of Rs 1,79,131.04 crore has been proposed for infrastructure development.

CM Yogi Adityanath  : शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट में 1,06,360 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान किया गया है।

Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath ने आज के दिन को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य ने अन्य राज्यों की तुलना में सबसे बड़ा बजट विधानसभा में प्रस्तुत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में यह राज्य सरकार का 9वां बजट है। बीते आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश के विकास के लिए उठाए गए कदमों के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

मुख्यमंत्री विधान सभा में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा वर्ष 2025-26 का बजट प्रस्तुत किए जाने के बाद तिलक हॉल में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश की आकांक्षाओं के अनुरूप बजट पेश करने के लिए वित्त मंत्री, अपर मुख्य सचिव वित्त और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।

CM Yogi Adityanath ने कहा कि यह वर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संविधान लागू होने का अमृत महोत्सव वर्ष है। साथ ही, यह उत्तर प्रदेश की स्थापना का भी अमृत महोत्सव वर्ष है। आगामी 25 वर्षों की कार्ययोजना को ध्यान में रखते हुए यह बजट तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बताया कि लखनऊ में ‘भारतरत्न डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र’ का निर्माण किया जा रहा है, जो शीघ्र ही उनके विचारों का प्रमुख केंद्र बनेगा और संविधान की मूल भावना के अनुरूप वंचितों को प्राथमिकता देने के कार्य को आगे बढ़ाएगा। इसी थीम के आधार पर वर्ष 2025-26 का बजट भी तैयार किया गया है।

CM Yogi Adityanath ने कहा कि बीते आठ वर्षों में प्रदेश में एक निश्चित थीम के साथ बजट प्रस्तुत किया गया है। 2017-18 का बजट किसानों को समर्पित था, जिसमें किसानों की ऋणमाफी, एमएसपी का लाभ, गन्ना मूल्य के भुगतान, उन्नत बीज और सिंचाई सुविधाओं पर ध्यान दिया गया। इन प्रयासों से किसानों की आय में दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई। 2018-19 का बजट औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित था, जिससे उत्तर प्रदेश देश के एक्सप्रेस-वे नेटवर्क में 55% से अधिक की भागीदारी हासिल कर सकेगा। इसके अलावा, उसी वर्ष पहली इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन भी हुआ था।

2019-20 का बजट महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित रहा, जिसमें मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, कन्या सुमंगला योजना और मिशन शक्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को प्राथमिकता दी गई। इन सभी प्रयासों से उत्तर प्रदेश ने तेजी से प्रगति की है और यह बजट भी राज्य के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए पुलिस बल में महिलाओं के लिए 20% पदों को अनिवार्य किया है।

CM Yogi Adityanath ने बताया कि 2020-21 का बजट युवाओं के विकास और रोजगार सृजन पर केंद्रित था, जिसमें दो करोड़ युवाओं को टैबलेट/स्मार्टफोन देकर तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की योजना लागू की गई। 2021-22 का बजट ‘स्वावलंबन से सशक्तिकरण’ की थीम पर आधारित था, जिसमें एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देकर पारंपरिक उत्पादों को प्रोत्साहित किया गया और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी गई।

2022-23 का बजट ‘अंत्योदय से आत्मनिर्भरता’ की अवधारणा पर केंद्रित रहा। इसमें ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देते हुए पंचायतों की आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ग्राम सचिवालयों के निर्माण को बढ़ावा दिया गया, जिससे प्रत्येक ग्राम पंचायत में 5-7 रोजगार के अवसर सृजित हुए। 2023-24 का बजट उत्तर प्रदेश के समावेशी और समग्र विकास को मजबूत करने वाला बजट रहा।

2024-25 के बजट में रामराज्य की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए पर्यटन, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में विकास की संभावनाओं को बढ़ाया गया। इस बजट के तहत पहली बार उत्तर प्रदेश में 65 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ, जिसमें 14 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक भी शामिल थे। इसके परिणामस्वरूप, उत्तर प्रदेश पर्यटन में देश में शीर्ष स्थान प्राप्त करने में सफल हुआ।

CM Yogi Adityanath ने बताया कि 2025-26 का बजट सनातन संस्कृति के ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ सिद्धांत को समर्पित है, जिसमें गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के कल्याण को प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वंचितों को प्राथमिकता’ देने के विजन के अनुरूप यह बजट तैयार किया गया है।

2025-26 के बजट का कुल आकार 8.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जो 2024-25 के बजट से 9.8% अधिक है। यह वृद्धि राज्य की आर्थिक क्षमता को दर्शाती है और डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता को साबित करती है। बजट में 2.25 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय प्रस्तावित है, जिससे आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी और नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को और गति मिलेगी।

CM Yogi Adityanath ने बताया कि 2017-18 में राज्य की जीडीपी 12.89 लाख करोड़ रुपये थी, जो 2024-25 में 27.51 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यह वृद्धि तब हुई है जब तीन वर्षों तक वैश्विक महामारी कोरोना का संकट रहा। 2016-17 में उत्तर प्रदेश देश की छठी-सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, लेकिन अब यह देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

सरकार ने राजस्व लीकेज को रोककर, टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग कर और नए राजस्व स्रोत विकसित कर राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। परिणामस्वरूप, 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में उत्तर प्रदेश कर राजस्व प्राप्ति के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार 5-T मॉडल (ट्रेड, टूरिज्म, टेक्नोलॉजी, ट्रेडिशन और टैलेंट) के मंत्र पर काम कर रही है। इसके तहत उत्तर प्रदेश अपने श्रमिक बल को आर्थिक शक्ति में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2025-26 का बजट उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

बजट में राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 2.97% रखा गया है, जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित 3% की सीमा से कम है। यह सरकार के वित्तीय प्रबंधन और अनुशासन का बेहतरीन उदाहरण है। नीति आयोग की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को फिस्कल हेल्थ इंडेक्स में 8 अंकों की बढ़त के साथ अग्रणी राज्य के रूप में स्थान दिया गया है।

बीते 8 वर्षों में उत्तर प्रदेश का पूंजीगत व्यय 1.8% से बढ़कर 19.3% तक पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इससे स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश लगातार आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास की ओर बढ़ रहा है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को मजबूती मिल रही है।

प्रदेश में बेरोजगारी की दर को कम करने में सफलता मिली है और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं। राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। लगातार प्रयासों से बीते आठ वर्षों में राज्य को लगभग 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को जमीन पर उतारा गया है। इससे 60 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में सफलता मिली है।

वर्ष 2025-26 के बजट में नई योजनाओं के लिए 28,478.31 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें अवस्थापना विकास हेतु 1,79,131.04 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं, जो कुल बजट का 22 प्रतिशत है। इस बजट में ऊर्जा, सिंचाई, उद्योग, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन और नागरिक उड्डयन के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। जिला मुख्यालयों वाली नगर पालिका परिषदों को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित करने की योजना बनाई गई है। साथ ही, कानपुर, मेरठ और मथुरा के बुनियादी ढांचे को प्रयागराज की तरह विकसित किया जाएगा। शिक्षा के लिए 1,06,360 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो कुल बजट का 13 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश उन गिने-चुने राज्यों में से है जो शिक्षा पर इतना अधिक व्यय कर रहे हैं।

कृषि क्षेत्र को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। कृषि और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों जैसे बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, सहकारिता, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, नमामि गंगे और ग्रामीण जल आपूर्ति के लिए 89,353 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो कुल बजट का 11 प्रतिशत है। वहीं, चिकित्सा क्षेत्र के लिए 50,550 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जो कुल बजट का 6 प्रतिशत है।

राज्य के प्रत्येक जिले में कैंसर डे-केयर सेंटर स्थापित करने की योजना है, जिसके लिए आवश्यक धनराशि की व्यवस्था बजट में की गई है। इस योजना के तहत पहले चरण में हर जिले में कैंसर रोगियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। होम गार्ड, पीआरडी जवान, ग्राम चौकीदार, शिक्षामित्र, बेसिक शिक्षा विभाग के अनुदेशक, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कर्मी, एएनएम, संविदा कर्मचारी और स्वच्छता से जुड़े सभी कर्मचारियों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के तहत 5 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सुविधा मिलेगी।

समाज कल्याण हेतु बजट में 35,863 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जो सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, महिला एवं बाल कल्याण जैसी योजनाओं में खर्च होगी। छात्रवृत्ति के लिए 4,720 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह हेतु 900 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जबकि सामाजिक पेंशन योजनाओं के लिए 13,648 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश अब एक राजस्व अधिशेष राज्य (Revenue Surplus State) बन चुका है और यह बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकलकर भारत के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। इस बार के बजट में चार नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण की घोषणा की गई है, जिनमें—

  1. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को गंगा एक्सप्रेस-वे से हरदोई होते हुए फर्रुखाबाद तक जोड़ने की योजना।
  2. गंगा एक्सप्रेस-वे को प्रयागराज, मीरजापुर, वाराणसी, चंदौली होते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की योजना, जिसे विन्ध्य एक्सप्रेस-वे नाम दिया जाएगा।
  3. मेरठ-हरिद्वार के बीच गंगा एक्सप्रेस-वे विस्तारीकरण एक्सप्रेस-वे का निर्माण।
  4. गंगा एक्सप्रेस-वे को बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए धनराशि का प्रावधान।

इसके अलावा, प्रयागराज में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शास्त्री पुल के समानांतर गंगा नदी पर और यमुना नदी पर सिग्नेचर ब्रिज के समानांतर एक-एक नए पुल के निर्माण के लिए बजट में धनराशि आवंटित की गई है। लखनऊ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब के रूप में विकसित करने के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। राज्य के सभी मंडल मुख्यालयों पर एक-एक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण कराया जाएगा, जहां सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। प्रत्येक ग्राम पंचायत में उत्सव भवन बनाने के लिए भी बजट में राशि निर्धारित की गई है, जिससे ग्रामीणों को शादी, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए स्थान मिल सके।

बीते आठ वर्षों में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के चलते 6 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने में सफलता मिली है। इस वर्ष के केंद्रीय बजट में गरीबी उन्मूलन के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए गरीबी मुक्त समाज की दिशा में कदम उठाना आवश्यक है। उत्तर प्रदेश, जो देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है, को इस लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है। राज्य सरकार ने अपने बजट में गरीबी उन्मूलन हेतु विशेष प्रावधान किए हैं। इसके तहत उन परिवारों को सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिनके पास आज कोई आधारभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है। साथ ही, ऐसे परिवारों के एक सदस्य को रोजगार देने का प्रयास किया जाएगा ताकि परिवार की वार्षिक आय कम से कम 1.25 लाख रुपये सुनिश्चित की जा सके।

युवाओं के रोजगार, उद्यमिता और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हर जिले में सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर एक डिस्ट्रिक्ट इकोनॉमिक जोन (District Economic Zone) स्थापित किया जाएगा। यह युवाओं को उनके ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इन इकोनॉमिक जोन को औद्योगिक विकास, MSME, टेक्सटाइल, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, प्रदेश सरकार संत कबीर के नाम पर 10 जिलों में टेक्सटाइल पार्क स्थापित करेगी, जबकि संत रविदास के नाम पर 2 जिलों में लेदर पार्क बनाए जाएंगे। वर्ष 2024, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी का वर्ष है। इस उपलक्ष्य में राज्य सरकार उनके नाम पर नगरीय क्षेत्रों में पुस्तकालय और डिजिटल लाइब्रेरी के निर्माण को प्राथमिकता से आगे बढ़ाएगी।

CM Yogi Adityanath ने घोषणा की कि राज्य सरकार आउटसोर्सिंग कर्मियों के न्यूनतम वेतन को सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत, इन कर्मियों को 16 से 18 हजार रुपये का न्यूनतम वेतन सीधे उनके बैंक खातों में मिलेगा। इस योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए एक निगम की स्थापना की जाएगी, और इसे राज्य सरकार द्वारा सीधे संचालित किया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरा वेतन सीधे कर्मियों के खाते में जमा किया जाएगा।

CM Yogi Adityanath ने बताया कि इस वर्ष उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान शुरू किया गया, जिसमें अब तक 98 हजार से अधिक युवाओं ने आवेदन किया है। इनमें से 76 हजार आवेदन बैंकों को भेजे जा चुके हैं, 16 हजार को ऋण स्वीकृत हुआ, और 6 हजार लाभार्थियों को ऋण वितरित किया जा चुका है। सरकार ने आगामी वर्ष में 1 लाख युवा उद्यमियों को सहायता प्रदान करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है।

प्रदेश में वानिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसमें वन आच्छादन में वृद्धि देखी गई है। पिछले आठ वर्षों में सरकार ने 210 करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य हासिल किया, और पिछले वर्ष ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 36 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना की योजना भी आगे बढ़ रही है, जिसका उद्देश्य औद्यानिक फसलों को प्रोत्साहित करना है।

राज्य सरकार किसानों के लिए उन्नत बीज उपलब्ध कराने हेतु लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर एक सीड पार्क स्थापित करेगी, जिसके लिए 251 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, 26 जनपदों में यू.पी. एग्रीज योजना के तहत 4,000 करोड़ रुपये के निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। छाता चीनी मिल के विस्तार और पिपराइच चीनी मिल के इंटीग्रेटेड शुगर कॉम्प्लेक्स में डिस्टिलरी निर्माण हेतु भी बजट में धनराशि आवंटित की गई है।

राज्य के हर जिले की प्रमुख मंडियों में पहले चरण में किसानों के लिए विश्रामालय और अन्नपूर्णा कैंटीन का निर्माण किया जाएगा, जहां किसानों को कम कीमत पर भोजन मिलेगा। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत आपदा के कारण किसानों की मृत्यु होने पर 1,050 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलेगा। निराश्रित गोवंश के रखरखाव के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

CM Yogi Adityanath ने मेधावी छात्राओं को स्कूटी प्रदान करने के लिए 400 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है। यह योजना रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर संचालित होगी। CM Yogi Adityanath सामूहिक विवाह योजना के तहत अब तक 4 लाख से अधिक बेटियों की शादी करवाई जा चुकी है, और अब प्रत्येक जोड़े के लिए अनुदान राशि 51 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। विधवा पुनर्विवाह हेतु प्रोत्साहन राशि और निराश्रित महिलाओं की पुत्रियों के विवाह सहायता राशि भी बढ़ाकर 1-1 लाख रुपये कर दी गई है।

राज्य के सात जिलों—वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज, गोरखपुर, कानपुर नगर, झांसी और आगरा में श्रमजीवी महिलाओं के लिए पुण्यश्लोक माता अहिल्याबाई होलकर के नाम पर हॉस्टल बनाने की योजना है। इस उद्देश्य के लिए बजटीय प्रावधान किया गया है, क्योंकि यह माता अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती का वर्ष है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं के लिए अतिरिक्त मानदेय के रूप में 971 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के विकास को ध्यान में रखते हुए, प्रयागराज महाकुंभ से जुड़ी योजनाओं में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संभावित आर्थिक वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। अयोध्या क्षेत्र में पर्यटन विकास के लिए 150 करोड़ रुपये, मथुरा-वृंदावन के लिए 100 करोड़ रुपये, श्री बांके बिहारी जी मंदिर कॉरिडोर के लिए 150 करोड़ रुपये, और मां विंध्यवासिनी धाम व त्रिकोणीय क्षेत्र के विकास के लिए 200 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। नैमिषारण्य में पर्यटन सुविधाओं और वेद विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 100-100 करोड़ रुपये तथा चित्रकूट में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

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