पंजाब कैबिनेट की बैठक में लिए जा सकते हैं ये 4 अहम फैसले, CM Mann ने किया बैठक का आह्वान।

These 4 important decisions can be taken in the Punjab Cabinet meeting, CM Mann called a meeting.

CM Mann : पंजाब सरकार की कैबिनेट बैठक पहले 10 फरवरी को निर्धारित थी, लेकिन दिल्ली में आप प्रमुख केजरीवाल ने प्रदेश के सभी मंत्रियों और विधायकों की बैठक बुला ली थी, जिससे यह बैठक स्थगित करनी पड़ी।

पंजाब सरकार की कैबिनेट बैठक आज चार महीने बाद होने जा रही है, जिसमें करीब 65 एजेंडों पर फैसले लिए जाएंगे। बैठक में प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर ढाई फीसदी तक स्टांप ड्यूटी लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है। इसके अलावा जेल, हाउसिंग, सेहत विभाग और कुछ नगर निगमों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। अमेरिका से डिपोर्ट किए गए पंजाबी युवाओं का मामला भी बैठक में उठने की उम्मीद है। यह बैठक दोपहर 12 बजे CM Mann की अध्यक्षता में होगी। गौरतलब है कि इस महीने दो बार बैठक की तारीख बदली गई थी।

ब्रिज और रैंप पॉलिसी को मंजूरी संभव
बैठक में ब्रिज और रैंप पॉलिसी को स्वीकृति मिलने की संभावना है, जिसके तहत नहरों और ड्रेनों पर बनने वाले पुलों के लिए मंजूरी और शुल्क अनिवार्य होगा। इसके अलावा, एसिड अटैक पीड़ितों की पेंशन को 8,000 से बढ़ाकर 10,000 रुपये करने पर भी सरकार विचार कर सकती है।

अगर ऐसा होता है, तो यह सात साल बाद लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय होगा। इस पेंशन योजना की शुरुआत कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इसी तरह, डेवलपरों को आंतरिक विकास शुल्क (EDC) का 50% विकास कार्यों पर खर्च करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

इसके अलावा, कैबिनेट बैठक में सुशासन (गुड गवर्नेंस) को प्राथमिकता दी जाएगी। अप्रूवल प्रक्रिया को सरल बनाने, फास्ट-ट्रैक कोर्ट, लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और नए UPSC प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही, पराली प्रबंधन और गिरते जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक निर्णय लिए जा सकते हैं।

पहले पेट्रोल-डीजल पर लगाया गया था वैट

साल 2024 में सरकार लगातार चुनावी दौर से गुजरी। पहले लोकसभा चुनाव हुए, फिर चार सीटों पर उपचुनाव संपन्न हुए। इसके बाद पंचायत और निकाय चुनाव कराए गए, और फरवरी में दिल्ली विधानसभा चुनाव भी हुए। इस चुनावी व्यस्तता के चलते सरकार कोई बड़ा निर्णय नहीं ले पाई।

हालांकि, पार्टी ऐसा कोई कदम उठाने से बचना चाहती थी, जिससे जनता की नाराजगी झेलनी पड़े। सितंबर में सरकार ने पेट्रोल पर 61 पैसे प्रति लीटर और डीजल पर 92 पैसे प्रति लीटर वैट बढ़ाया था। इसके अलावा, 7 किलोवाट लोड वाले बिजली उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सब्सिडी भी समाप्त कर दी गई थी।

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