Delhi Assembly का मानसून सत्र आज से शुरू हो गया है, जिसमें निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर लगाम लगाने के उद्देश्य से एक नया विधेयक पेश किया जाएगा। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल से जुड़ी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की दो रिपोर्टें भी सदन में रखी जाएंगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता विधानसभा में इन रिपोर्टों को प्रस्तुत करेंगी।
इनमें से पहली रिपोर्ट राज्य की वित्तीय स्थिति (2023-24) से संबंधित है, जबकि दूसरी रिपोर्ट भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण पर केंद्रित है, जो 31 मार्च 2023 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के आंकड़ों पर आधारित है। इससे पहले के सत्रों में भी भाजपा सरकार द्वारा आम आदमी पार्टी पर कुप्रबंधन के आरोप लगाते हुए कई रिपोर्टें पेश की जा चुकी हैं।
फीस नियंत्रण विधेयक पर ज़ोर
शिक्षा मंत्री आशीष सूद दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक, 2025 सदन में पेश करेंगे। इसका उद्देश्य निजी स्कूलों द्वारा फीस तय करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करना, पारदर्शिता लाना, और अभिभावकों की शिकायतों के निवारण के लिए एक स्पष्ट तंत्र स्थापित करना है।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
विधेयक के तहत, अगर कोई स्कूल फीस वापसी में देरी करता है, तो 20 दिनों के बाद जुर्माना दोगुना, 40 दिनों के बाद तिगुना हो जाएगा, और हर 20 दिन की देरी पर यह जुर्माना बढ़ता रहेगा। बार-बार नियम तोड़ने पर स्कूल प्रबंधन से पद छीनने और भविष्य में शुल्क संशोधन की अनुमति रद्द करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।
पहली बार उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर 1 लाख से 5 लाख रुपए और बार-बार उल्लंघन पर 2 लाख से 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
डिजिटल व्यवस्था की ओर कदम
इस सत्र में विधायकों को सभी दस्तावेज़ डिजिटल रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे। रेखा गुप्ता सरकार के तहत यह मानसून सत्र दिल्ली विधानसभा का तीसरा सत्र होगा।