मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यमुना पुनर्जीवन मिशन 2028: दिल्ली के नालों और सीवर नेटवर्क सुधार से यमुना बनेगी फिर से स्वच्छ और जीवनदायिनी।
दिल्ली सरकार ने यमुना को फिर से स्वच्छ और प्रवाहमान बनाने के लिए बहुआयामी अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को मिशन-मोड में ठोस एक्शन प्लान लागू करने के निर्देश दिए। इस योजना में नालों की ड्रोन निगरानी, नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाने और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय जैसे कदम शामिल हैं।
मिशन 2028: अनधिकृत कॉलोनियों और जेजे क्लस्टर्स में सीवर लाइन
मिशन 2028 के तहत दिल्ली की 1799 अनधिकृत कॉलोनियों और 675 जेजे क्लस्टर्स में सीवर नेटवर्क का काम चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि जब तक हर घर का कनेक्शन सीवर से नहीं जुड़ेगा, यमुना में गंदा पानी गिरना बंद नहीं होगा।
सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता बढ़ाई जाएगी
वर्तमान में दिल्ली में 37 एसटीपी मिलकर रोजाना 814 मिलियन गैलन गंदा पानी साफ कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 1500 एमजीडी करना है। इसमें पुरानी मशीनों का सुधार और 35 नए डिसेंट्रलाइज्ड प्लांट स्थापित करने का कार्य शामिल है। इससे यमुना में गंदा पानी सीधे नहीं जाएगा, बदबू और प्रदूषण कम होंगे और नदी में जीवन लौटेगा।
नालों की निगरानी और ड्रोन सर्वे
यमुना के प्रदूषण पर निगरानी के लिए पहली बार पुख्ता सिस्टम बनाया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की टीमें 47 स्थानों पर हर महीने पानी की जांच करेंगी। नजफगढ़ और शाहदरा नालों से जुड़े सभी छोटे नालों की पहचान और ड्रोन सर्वे जनवरी 2026 तक पूरा हो जाएगा, जबकि बाकी नालों का सर्वे जून 2026 तक पूरा किया जाएगा।
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पड़ोसी राज्यों से समन्वय
यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए हरियाणा और उत्तर प्रदेश के नालों से आने वाले दूषित पानी को नियंत्रित करना जरूरी है। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री से समाधान पर चर्चा की जाएगी।
गाद निपटान और घाट निर्माण
सीएम ने निर्देश दिए कि नालों और सड़कों से निकलने वाली गाद (सिल्ट) को वैज्ञानिक तरीके से निपटाने के लिए बायो-माइनिंग और प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएं। यमुना के किनारे पक्के और व्यवस्थित घाट बनाने की योजना भी बनाई जाएगी।
औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण
औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को नियंत्रित किया जाएगा। नियोजित क्षेत्रों में अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP) की नियमित जांच होगी और गैर नियोजित क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को दंडित किया जाएगा।
मिशन की समय सीमा और लक्ष्य
दिल्ली के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने बताया कि वर्ष 2028 तक यमुना पुनर्जीवन मिशन के अंतर्गत सभी प्रमुख नालों और सीवर नेटवर्क कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे। डीडीए और अन्य विभाग पूरी तरह से एकीकृत और समयबद्ध तरीके से योजना को लागू कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना को केवल नदी नहीं बल्कि दिल्ली की जीवनरेखा बताया और मिशन-मोड योजना के तहत इसे फिर से स्वच्छ और जीवंत बनाने का संकल्प दोहराया।