पंजाब विधानसभा में हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि एमजीएनआरईगा को समाप्त करना गरीबों और दलित श्रमिकों के रोजगार अधिकार के खिलाफ है। जानें नए कानून के संभावित प्रभाव।
पंजाब विधानसभा में कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने एमजीएनआरईगा (MGNREGA) अधिनियम को समाप्त कर नए कानून विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025 लाए जाने के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम गरीबों को उनकी रोजगार और आजीविका के अधिकार से वंचित करने का प्रयास है।
केंद्र सरकार पर संघवाद के सिद्धांतों का उल्लंघन
हरभजन सिंह ईटीओ ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों का हनन कर रही है और संघवाद के मूल सिद्धांतों के खिलाफ कार्य कर रही है। उन्होंने भाखरा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB), पंजाब विश्वविद्यालय और चंडीगढ़ से जुड़े हालिया विवादों का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न बहानों के जरिए राज्य सरकारों की शक्तियों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
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एमजीएनआरईगा और ग्राम पंचायतों की भूमिका
मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने बताया कि 1993 के 73वें संविधान संशोधन के तहत 29 विषय ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किए गए। इसी ढांचे के तहत एमजीएनआरईगा लागू किया गया, जिसने पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्य योजना बनाने और क्रियान्वित करने की स्वतंत्रता दी। लेकिन नए कानून के तहत, पंचायतों की यह क्षमता सीमित हो जाएगी, जिससे काम के अधिकार का प्रभावी कार्यान्वयन मुश्किल हो जाएगा।
दलित समुदाय और रोजगार पर प्रभाव
हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि नया कानून दलित विरोधी है, क्योंकि एमजीएनआरईगा के लगभग 73% श्रमिक दलित समुदाय से संबंधित हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह संविधान के आदर्शों और सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ काम कर रही है।