उत्तराखंड के सभी होटलों में अब पारंपरिक व्यंजन होंगे अनिवार्य। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने होटल मेन्यू में स्थानीय थालियों और व्यंजनों को शामिल करने का ऐलान किया। पर्यटन और स्थानीय संस्कृति को मिलेगा नया बढ़ावा।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की खानपान और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि अब उत्तराखंड के सभी होटलों के मेन्यू में पारंपरिक उत्तराखंडी व्यंजन शामिल करना अनिवार्य होगा। यह फैसला हाल ही में आयोजित “शेफ संवाद” कार्यक्रम के दौरान लिया गया, जिसमें युवा शेफ, होटल उद्योग विशेषज्ञ और पर्यटन क्षेत्र के जानकार मौजूद थे।
पारंपरिक व्यंजनों को मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पारंपरिक थालियाँ और स्थानीय व्यंजन राज्य की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं। उनका उद्देश्य न केवल पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि स्थानीय व्यंजनों की गुणवत्ता, पहचान और स्वाद को भी संरक्षित करना है। अब होटल मालिकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने मेन्यू में उत्तराखंडी व्यंजन हमेशा शामिल करें, ताकि राज्य के वास्तविक पहाड़ी स्वाद का अनुभव पर्यटकों को मिले।
also read: उत्तराखंड में सड़क, पानी और पंचायतों के लिए जारी हुआ…
युवा शेफ संवाद कार्यक्रम का महत्व
“शेफ संवाद” कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक खानपान को प्रोत्साहित करना और इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। इस कार्यक्रम में युवा शेफों ने पारंपरिक व्यंजनों को पेश करने के नए तरीकों, उनकी गुणवत्ता मानकीकरण और पर्यटन के क्षेत्र में संभावनाओं पर सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने होटल और पर्यटन विभाग को इसके लिए विस्तृत योजना बनाने के निर्देश भी दिए।
देशभर के शेफों का योगदान
कार्यक्रम में देशभर से युवा शेफ, पर्यटन विशेषज्ञ और होटल उद्योग से जुड़े लोग शामिल हुए। उन्होंने मंडुवा, झंगोरा, कोदा जैसे पारंपरिक व्यंजनों को होटल मेन्यू में शामिल करने के तरीकों पर चर्चा की। यह कदम स्थानीय खानपान को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी खोलेगा।
सांस्कृतिक और आर्थिक लाभ
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्थानीय व्यंजनों को होटल मेन्यू में शामिल करने से उत्तराखंड की संस्कृति को मजबूती मिलेगी और राज्य के पर्यटन, खानपान और कृषि उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। यह छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित करेगा।
उत्तराखंड सरकार का यह कदम न केवल राज्य की पारंपरिक भोजन संस्कृति को संरक्षित करेगा, बल्कि पहाड़ी पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। अब पर्यटक न केवल प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करेंगे, बल्कि उत्तराखंड के असली स्थानीय स्वाद का आनंद भी ले सकेंगे।